लखनऊ। संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा को लेकर पूर्व डीजीपी और राज्यसभा सांसद बृज लाल ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि संभल में हुई हिंसा अचानक भड़का आक्रोश नहीं थी, बल्कि इसके पीछे सुनियोजित साजिश थी। उन्होंने अपने लेख में एसआईटी की जांच और उच्चस्तरीय जांच आयोग के निष्कर्षों का हवाला देते हुए हिंसा से जुड़े कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
बृज लाल ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर ऐतिहासिक स्थल के वैज्ञानिक सर्वे के दौरान पुलिस और सर्वे टीम पर पथराव व गोलीबारी की गई। उनके मुताबिक, पुलिस और प्रशासन की तत्परता से स्थिति को जल्द नियंत्रित किया गया और हिंसा को व्यापक रूप लेने से रोका गया।
सपा सांसद पर लगाए गंभीर आरोप
पूर्व डीजीपी ने संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क को हिंसा की साजिश में प्रमुख भूमिका निभाने का आरोप लगाया। उन्होंने बिजली चोरी के मामले का भी उल्लेख किया और दावा किया कि सांसद के खिलाफ बड़ी रकम की रिकवरी निकली है।
इसके अलावा उन्होंने सपा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल, जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और अन्य लोगों पर भी हिंसा की साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए।
बृज लाल ने यह भी दावा किया कि हिंसा के तार एक कथित अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क से जुड़े थे और दुबई में बैठे एक आरोपी के जरिए अवैध गतिविधियों से हासिल धन का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी और हिंसा के लिए किया जाता था।
अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना
बृज लाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व ने संभल जाकर आरोपी सांसद के समर्थन में राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने इसे ‘वोटबैंक और तुष्टिकरण की राजनीति’ करार दिया।
संभल के पुराने दंगों का किया जिक्र
अपने लेख में बृज लाल ने संभल के पुराने दंगों और बदलती जनसांख्यिकी का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि 1920 के दशक से अब तक संभल में कई बड़े दंगे हो चुके हैं और लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण हिंदू समुदाय के एक हिस्से को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने 29 मार्च 1978 को हुए संभल के दंगों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस हिंसा में बड़ी संख्या में हिंदुओं की हत्या हुई थी और उनकी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था।
1993 में मुकदमों की वापसी का आरोप
बृज लाल ने अपने लेख में आरोप लगाया कि दिसंबर 1993 में तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान 1978 के दंगों से जुड़े कई मुकदमे वापस ले लिए गए थे। उनका कहना है कि इसके बाद संभल में दंगाइयों को राजनीतिक संरक्षण मिलने का सिलसिला जारी रहा।
‘कानून से ऊपर कोई नहीं’
पूर्व डीजीपी ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। उन्होंने 24 नवंबर 2024 की हिंसा के बाद हुई गिरफ्तारियों का जिक्र करते हुए कहा कि कार्रवाई से यह संदेश गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
बृज लाल ने दावा किया कि संभल हिंसा के मामले में पुलिस की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
