उत्तर प्रदेश के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक द्वारा बटुक ब्राह्मणों के सम्मान की पहल का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कहा कि प्रदेश के दोनों डिप्टी सीएम “किसी पावर में ही नहीं हैं”, क्योंकि गृह विभाग यानी पुलिस सीधे सीएम योगी आदित्यनाथ के नियंत्रण में है। इसलिए उनके पास कार्रवाई करने की क्षमता नहीं है और इस तरह के बयान केवल “दिल बहलाने” के लिए दिए जा रहे हैं।
माघ मेले में विवाद
शंकराचार्य ने बताया कि 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम स्नान के लिए जाते समय उन्हें रास्ते में पुलिस ने रोका। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ आए बटुक ब्राह्मणों की चोटी तक खींची गई। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “शिखा खींचना महापाप है और ऐसा करने वालों को पाप लगता है।” इस बयान के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई।
11 मार्च को लखनऊ पहुंचने का आह्वान
शंकराचार्य ने हिंदू समाज से आह्वान किया है कि यदि सीएम योगी ने 10 मार्च तक गऊ को राज्य माता का दर्जा नहीं दिया और गऊ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया, तो 11 मार्च को अधिक से अधिक संख्या में लखनऊ पहुंचकर उनका समर्थन करें और सरकार पर दबाव बनाएं।
गऊ संरक्षण पर आरोप
शंकराचार्य ने पशु गणना 2019-2024 के आंकड़े साझा किए, जिसमें बताया गया कि पश्चिम बंगाल में इस अवधि में गायों की संख्या 15% बढ़ी, जबकि यूपी में गायों की संख्या 4% से ज्यादा कम हुई। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि गऊ संरक्षण में पश्चिम बंगाल यूपी से बेहतर काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के कई नेता पार्टी लाइन से हटकर उनके समर्थन में हैं और आने वाली सरकार गऊ रक्षकों के वोट से ही बनेगी।
संघ प्रमुख के तीन बच्चे होने के बयान पर प्रतिक्रिया
शंकराचार्य ने कहा कि संघ प्रमुख को चाहिए कि पहले अपने स्वयंसेवकों से विवाह करने के लिए कहें और बच्चों की संख्या का निर्णय गृहस्थ पर छोड़ दें। बच्चों की संख्या तय करना व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला है।
