दिल के मरीजों को ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए, वरना उनका दिल धोखा दे सकता है. अक्सर डॉक्टर इस तरह की हिदायत देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि आखिर इसके पीछे क्या कारण हो सकता है. दरअसल, हार्ट का काम शरीर में ब्लड पंप करता है. जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्व हर ऑर्गन तक सही तरीके से पहुंच पाता है.
हार्ट के मरीजों के लिए शरीर में सोडियम, पोटैशियम, मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बनाना बेहद जरूरी होता है. ज्यादा पानी या लिक्विड लेने पर इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस बिगड़ सकता है और हार्ट में कई तरह की समस्याएं बढ़ सकती हैं.
डॉक्टर्स के मुताबिक, बेशक स्वस्थ शरीर के लिए पानी ज्यादा फायदेमंद है लेकिन दिल के मरीजों के लिए यह खतरनाक हो सकता है. ज्यादा पानी पीने से हार्ट पेशेंट के शरीर में हार्ट पंपिंग में गड़बड़ी, आर्टरीज में कमजोरी, धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इससे हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर का रिस्क काफी ज्यादा बढ़ जाता है. यही कारण है कि डॉक्टर्स दिल के मरीजों को कम पानी पीने की सलाह देते हैं.
दिल के मरीजों में हार्ट पंपिंग की क्षमता कम हो जाती है. इस वजह से ज्यादा पानी पीने से शरीर तरल पदार्थ को पूरी तरह बाहर नहीं निकाल पाता है. इससे फ्लूइड ओवरलोड की समस्या हो सकती है. इस वजह से शरीर में सूजन बढ़ सकती है. बहुत ज्यादा पानी पीने से पानी फेफड़ों में जमा हो जाता है, जिससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है. पानी फेफड़े में जमा होने से ऑक्सीजन लेने में परेशानीहोती है. जिसकी वजह से खांसी, घबराहट और अन्य समस्याएं हो सकती हैं. इसकी वजह से हाई ब्लड प्रेशर और असंतुलित इलेक्ट्रोलाइट्स का भी खतरा रहता है.
डॉक्टर्स का कहना है कि दिल के मरीजों को एक निश्चित मात्रा में ही पानी पीना चाहिए. हर दिन 1.5 से 2 लीटर तक पानी पीना उनके लिए पर्याप्त हो सकता है. पानी के अलावा दूध, सूप जैसे लिक्विड भी कम पीना चाहिए. डॉक्टर का कहना है कि दिल के मरीजों को इसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए.
