राम के नाम पर लगातार उबल रही है अयोध्या

राम के नाम पर लगातार उबल रही है अयोध्या

राम के नाम पर लगातार उबल रही है अयोध्या

Posted by: , Updated: 30/10/19 06:36:30pm


लखनऊ। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव अयोध्या धर्म नगरी में कार सेवकों पर गोली चलवाकर बाबरी मस्जिद तो उस दौर में बचा ली। लेकिन भारतीय राजनीति की दशा और दिशा हमेशा के लिए बदल गई। फिर तो यहीं से बीजेपी को संजीवनी मिली।और मुलायम सिंह यादव की छवि हिन्दू विरोधी बनाने में बीजेपी सफल रहीं।

अयोध्या का विवाद पांच सदियों से चला आ रहा है। तब से माना जाता है कि बाबर ने मन्दिर तुड़वा कर मस्जिद का निर्माण कराया। आजादी के बाद से अब तक इस विवाद ने देश की राजनीति को प्रभावित किया हैं।  जिसके कारण कई जगह हिंसा हुई। लोग मारे गए, जांच आयोग बनी, आरोपी तय हुए, अब  देश की सबसे बड़ी अदालत में इन सब मामलों के खत्म होने की उम्मीद जगी है।

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 पिछले पांच सदियों में अयोध्या का कालचक्र कैसे घूमा 

दरअसल अयोध्या में एक ऐसे स्थल पर मस्जिद बनवाया गया, जिसे हिंदू अपने आराध्य देव भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं ,और कहा जाता है कि मुगल राजा बाबर के सेनापति मीर बाकी ने यहां  मस्जिद बनवाई थी ,जिसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था ,बाबर 1526 में भारत आया और 1528 तक उसका साम्राज्य (वर्तमान अयोध्या) तक पहुंच गया ।

जब पहली बार अयोध्या में हुए थे दंगे 

कहा जाता है की अयोध्या में इस मुद्दे को लेकर पहला हिन्दू - मुस्लिम हिंसा 1853 में हुई थी। जब निर्मोही अखाड़ा ने ढांचा पर दावा करते हुए कहा कि जिस स्थल पर मस्जिद खड़ा है वहां एक मंदिर हुआ करता था। जिसे बाबर के शासनकाल में नष्ट किया गया था। उसके बाद अगले दो सालों तक इस मुद्दे को लेकर अवध में दंगा भड़कता रहा, फिर तो फैजाबाद जिला गजट 1905 के अनुसार1855 तक ,हिदू और मुसलमान दोनों एक ही इमारत में पूजा या इबादत करते रहें। 

फिलहाल 1857 में आजादी के पहले आंदोलन के चलते माहौल थोड़ा ठंडा पड़ गया ,1859 में ब्रिटिश शासकों ने मस्जिद के सामने एक दीवार बना दी , और परिसर के भीतरी हिस्से में ऐसे मुसलमानों को और बाहरी हिस्से में हिंदुओं को प्रार्थना करने की अनुमति दी ।

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1885 में पहली बार जिला अदालत में पहुचा विवादित मामला 

अयोध्या का मंजर हिन्दू मुस्लिम को लेकर इतना भयावह हो गया था कि मामला पहली बार अदालत में  गया। हिन्दू साधु महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनवाने की इजाजत मांगी । लेकिन अदालत ने ये अपील ठुकरा दी , इसके बाद में मामला गहराता गया और सिलसिलेवार तारीख का जिक्र मिलता हैं।
 

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