नई दिल्ली: तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से जारी पेन्नैयार नदी जल बंटवारा विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि एक महीने के भीतर जल विवाद न्यायाधिकरण (Tribunal) गठित किया जाए।
यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने दिया। यह निर्देश तमिलनाडु द्वारा कर्नाटक के खिलाफ 2018 में दायर मुकदमे में जारी किया गया।
विवाद की पृष्ठभूमि
-
कर्नाटक में पेन्नैयार नदी को दक्षिणा पिनाकिनी कहा जाता है।
-
तमिलनाडु ने 2018 में सुप्रीम कोर्ट में केस दायर किया, जिसमें आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार के नदी के ऊपरी हिस्से के फैसलों से नदी के निचले हिस्से में पानी का बहाव प्रभावित हुआ, और इससे तमिलनाडु को नुकसान हुआ।
-
केंद्र सरकार ने पहले यह सुझाव दिया था कि दोनों राज्यों के मंत्री स्तरीय बैठकों के माध्यम से मुद्दा हल किया जाए, लेकिन तमिलनाडु ने ट्रिब्यूनल बनाने पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की पहले की कार्रवाई
-
जनवरी 2019: कोर्ट ने तमिलनाडु को ट्रिब्यूनल बनाने की अनुमति दी।
-
नवंबर 2022: कोर्ट ने केंद्र सरकार को बातचीत में देरी के लिए फटकार लगाई।
-
2023: केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को स्थिति से अवगत कराया।
-
मई 2023: कोर्ट ने ट्रिब्यूनल बनाने की समय सीमा बढ़ाई।
-
दिसंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
अब क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार को एक महीने के भीतर ट्रिब्यूनल गठित करना अनिवार्य हो गया है। यह ट्रिब्यूनल दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारा विवाद सुलझाने और तमिलनाडु के नुकसान की समीक्षा करेगा।
-
इस मामले में सीनियर वकील वी. कृष्णमूर्ति और पी. विल्सन ने तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व किया।
-
केंद्रीय कैबिनेट ने अब तक ट्रिब्यूनल बनाने का अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन प्रस्ताव को कैबिनेट सचिवालय के जरिए मंजूरी के लिए भेजा गया।
