ठंड का मौसम शुरू होते ही सर्दी, जुकाम, खांसी और गले में खराश जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय सीधे मेडिकल स्टोर से बिना पर्ची ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाएं खरीद लेते हैं। हालांकि, राहत देने वाली ये दवाएं कई बार सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना सलाह दवाएं लेने की आदत आगे चलकर दिल, दिमाग, लिवर और किडनी पर बुरा असर डाल सकती है।
ओवर-द-काउंटर दवाएं हमेशा सुरक्षित नहीं
नोएडा स्थित मेदांता अस्पताल की चिकित्सक डॉ. अर्पिता कुलश्रेष्ठ के अनुसार, सर्दी-खांसी में इस्तेमाल होने वाली आम OTC दवाओं में
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डिकंजेस्टेन्ट
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एंटीहिस्टामिन
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खांसी दबाने वाली दवाएं
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दर्द और बुखार की गोलियां
शामिल होती हैं। लोग अक्सर इनके साइड इफेक्ट्स जाने बिना ही सेवन शुरू कर देते हैं। कई घरों में तो ये दवाएं पहले से स्टॉक में रखी रहती हैं और लक्षण दिखते ही गोली खा ली जाती है।
दवाओं का आपसी रिएक्शन भी बन सकता है खतरा
डॉ. अर्पिता बताती हैं कि इन दवाओं का शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी दूसरी बीमारी की दवा ले रहा हो, तो दवाओं के आपसी रिएक्शन (Drug Interaction) का खतरा बढ़ जाता है।
डिकंजेस्टेन्ट दवाएं नाक की सूजन कम कर सांस लेने में राहत देती हैं, लेकिन इनका लंबे समय तक इस्तेमाल उल्टा असर दिखा सकता है और नाक की समस्या और बढ़ सकती है।
खांसी सिरप और दर्द की गोलियां भी नुकसानदेह
खांसी दबाने वाली दवाओं में मौजूद डेक्स्ट्रोमेथोर्फन का जरूरत से ज्यादा या गलत इस्तेमाल करने से
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चक्कर
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भ्रम
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अजीब व्यवहार
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मूड में बदलाव
जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
वहीं पेरासिटामोल और इबुप्रोफेन जैसी दर्द-बुखार की दवाएं अधिक मात्रा में लेने पर
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लिवर
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किडनी
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पेट में ब्लीडिंग
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दिल से जुड़ी बीमारियों
का खतरा बढ़ा सकती हैं।
डॉक्टर क्यों देते हैं बार-बार चेतावनी?
डॉ. अर्पिता कुलश्रेष्ठ के अनुसार, भारत में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ रहा है। लोग छोटी-छोटी बीमारियों में भी एंटीबायोटिक लेने लगते हैं, जिससे शरीर के गट बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है।
उन्होंने बताया कि लगातार और बेवजह दवाएं लेने से शरीर में उन्हीं दवाओं के प्रति रेजिस्टेंस विकसित हो जाती है। जब भविष्य में सच में एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ती है, तब वह दवा असर करना बंद कर देती है।
क्या करें और क्या न करें?
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हल्के लक्षणों में पहले घरेलू उपाय अपनाएं
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2-3 दिन में आराम न मिले तो डॉक्टर से सलाह लें
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बिना जरूरत एंटीबायोटिक न लें
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दवाओं की डोज और अवधि का ध्यान रखें
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पहले से चल रही दवाओं की जानकारी डॉक्टर को जरूर दें
