दक्षिण भारत के मदुरै जिले का एक छोटा सा गांव ओथावीडु इन दिनों चर्चा में है। वजह है यहां का अनोखा नियम—गांव में किसी भी तरह का चुनावी प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित
क्या है खास नियम?
गांव में पोस्टर, बैनर, झंडे या राजनीतिक विज्ञापन लगाने पर रोक
कोई भी पार्टी दीवारों या सार्वजनिक जगहों पर प्रचार नहीं कर सकती तोहफे या फ्री चीजें लेना भी मना
यहां तक कि शादी या त्योहारों के पोस्टर भी नहीं लगते
गांव के दुकानदारों के मुताबिक, अगर कोई नियम तोड़ता है तो बुजुर्ग तुरंत उसे हटवा देते हैं।इन गांवों में नेता प्रचार करने आ सकते हैं, लेकिन जाते समय अपने सारे बैनर-झंडे साथ ले जाना जरूरी होता है।
क्यों बनाए गए ये नियम?
गांववालों का मानना है कि:लोग प्रचार से प्रभावित न हों हर व्यक्ति स्वतंत्र रूप से वोट दे सके गांव में राजनीतिक तनाव या झगड़े न हों एक निवासी के अनुसार, “जब वोट देने का समय आता है, तो हर कोई अपने विवेक से फैसला करता है—बिना किसी दबाव के।”
गांव के बाहर ही प्रचार
दिलचस्प बात यह है कि:सरकारी योजनाओं के बोर्ड भी गांव की सीमा के बाहर लगाए जाते हैं गांव के अंदर सिर्फ दुकानों के नाम और उनके विज्ञापन की अनुमति हैऔर भी गांव अपना रहे यही मॉडल तमिलनाडु के कई अन्य गांव भी इसी परंपरा का पालन कर रहे हैं, जैसे:
विरुधुनगर का मरुधनाथम
रामनाथपुरम का कोम्बूथी
थेनी का बालकृष्णपुरम इन गांवों में नेता प्रचार करने आ सकते हैं, लेकिन जाते समय अपने सारे बैनर-झंडे साथ ले जाना जरूरी होता है
क्या है इस मॉडल का असर?
शांतिपूर्ण चुनाव माहौल
कोई राजनीतिक विवाद नहीं
मतदाता पूरी तरह स्वतंत्र
