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किसानों के लिए कुछ नहीं, सरकार झूठ बोल रही है- सपा सांसद अवधेश प्रसाद

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2024-25 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर तीखा तंज कसते हुए कहा कि इसमें किसानों और मजदूरों के लिए कुछ भी ठोस नहीं है

“किसान खुशहाल नहीं तो देश खुशहाल नहीं”

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा,
“वित्त मंत्री ने आज सदन में आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट पेश की है, लेकिन इसमें किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। किसान हमारा अन्नदाता है। देश के करीब 72 फीसदी लोग कृषि से जुड़े हैं। जब तक किसान खुशहाल नहीं होगा, तब तक देश खुशहाल नहीं हो सकता।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार 2047 में विकसित भारत की जो तस्वीर दिखा रही है, वह हकीकत से कोसों दूर है।
“सरकार जो कह रही है, उससे लगता है कि वे झूठ बोल रहे हैं, जबकि जमीनी सच्चाई कुछ और है।”

मनरेगा और मजदूरी पर सरकार को घेरा

विकसित भारत–जी रामजी विधेयक को लेकर अवधेश प्रसाद ने कहा कि यह योजना पहले की मनरेगा जैसी ही है, जो करीब 20 साल पुरानी है।
उन्होंने कहा,
“20 साल पहले की मजदूरी और आज की मजदूरी में जमीन-आसमान का फर्क है। इस दौरान मुद्रा की क्रय शक्ति घटी है, महंगाई बढ़ी है। भारत में सोना-चांदी तक दुनिया के सबसे महंगे हो गए हैं। हर चीज महंगी हो चुकी है।”

उन्होंने मांग की कि अगर सरकार सच में किसानों और मजदूरों की हितैषी है, तो मजदूरी को आज की महंगाई के अनुरूप बढ़ाया जाना चाहिए।

“करोड़ों मजदूरों को नहीं मिला भुगतान”

अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि देश में करोड़ों किसान और मजदूर ऐसे हैं, जिन्होंने मेहनत की है, लेकिन उन्हें अब तक उसका भुगतान नहीं मिला।
उन्होंने कहा,
“ये संख्या सैकड़ों या हजारों में नहीं, बल्कि करोड़ों में है। आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में इस गंभीर मुद्दे पर कुछ नहीं कहा गया है। इसका मतलब क्या यह निकाला जाए कि मजदूरों को उनके काम का भुगतान नहीं मिलेगा?”

कार्यदिवस बढ़ाने की मांग

सरकार द्वारा कार्यदिवसों की संख्या 125 दिन किए जाने पर भी सपा सांसद ने सवाल उठाए।
उन्होंने कहा,
“देश के ज्यादातर श्रमिक दूसरे राज्यों में जाकर काम करते हैं। ऐसे में 125 दिन काफी नहीं हैं। यह संख्या कम से कम 200 दिन होनी चाहिए थी।”

उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार को पिछला बकाया भुगतान तुरंत पूरा कराना चाहिए और मजदूरी का भुगतान वर्तमान समय की आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से किया जाना चाहिए।

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