चुनाव के नतीजों के बाद से जिस बात की खूब चर्चा हो रही है, वो ये कि बीजेपी अपने दम पर बहुमत नहीं ला पाई. इकॉनमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट कहती है कि इन नतीजों के पीछे बीजेपी की तरफ़ की गई कई गलतियों का हाथ है. उम्मीदवारों के चयन में ग़लती की गई, दलितों के बीच ये बात पहुंची की अगर बीजेपी को 400 सीटें मिल गई तो वो संविधान में बदलाव कर देगी.
बीजेपी के कार्यकर्ताओं में एक उदासीनता थी, और वो इसलिए क्योंकि को एक के बाद एक जीत मिल रही थी ऐसे में पार्टी ने इस चुनाव में उतनी मेहनत नहीं की. कार्यकर्ताओं को लगा की बीजेपी का कोई मुकाबला नहीं है.
जब बीजेपी ने अपना टिकट बांटा तो कई सारे मौजूदा सांसदों को दोबारा टिकट मिला. लेकिन नतीजे आए तो पता चला इस चुनाव में 22 केंद्रीय मंत्री हार गए हैं.
जो मंत्री चुनाव हारे हैं उसमें स्मृति ईरानी, अर्जुन मुंडा, महेंद्र नाथ पांडे,आरके सिंह, राजीव चंद्रशेखर, अजय टेनी, कौशल किशोर, निरंजन ज्योति, संजीव बालियान, कैलाश चौधरी, दाने राओसाहेब,कपिल पाटिल, वी मुरलीधरन, लोगानाथन मुरुगन, नीशित प्रमाणिक और सुभाष सरकार का नाम शामिल है.
