हैदराबाद। टमाटर की गिरती कीमतों ने किसानों को भारी आर्थिक संकट में डाल दिया है। खुदरा बाजार में जहां टमाटर 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, वहीं मंडियों में किसानों को 2 रुपये प्रति किलो का भाव भी नहीं मिल पा रहा।
इसी बेबसी के चलते Telangana के Jangaon और Mahabubabad जिलों में किसानों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने अपनी पूरी फसल बाजार में मुफ्त बांट दी।
मंडी में नहीं मिला सही दाम
महबूबबाद के साप्ताहिक बाजार में तीन किसान—सरय्या, मोहन और सुरेंद्र—ट्रॉली भरकर टमाटर लेकर पहुंचे थे। लेकिन जब उन्हें पता चला कि 20 किलो टमाटर के बदले 40 रुपये भी नहीं मिल रहे, तो उन्होंने फसल मुफ्त में बांटने का फैसला कर लिया।
यही स्थिति जंगांव जिले के तारिगोप्पुला मंडल में भी देखने को मिली, जहां किसान सदाय्या ने अपनी ट्रॉली खाली करने के लिए लोगों से मुफ्त में टमाटर ले जाने की अपील की।
क्यों बेबस हैं किसान?
किसानों की इस दयनीय हालत के पीछे कई वजहें हैं:
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अत्यधिक उत्पादन: इस सीजन में टमाटर की पैदावार ज्यादा हुई है।
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मंडी में गिरते दाम: व्यापारियों द्वारा 2 रुपये प्रति किलो की खरीद।
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लागत से कम कीमत: बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी की लागत भी नहीं निकल पा रही।
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परिवहन खर्च का बोझ: मंडी तक लाने का खर्च भी वसूल नहीं हो रहा।
किसानों का आरोप है कि व्यापारी उनसे बेहद कम कीमत पर खरीदकर उपभोक्ताओं को 20 रुपये तक बेच रहे हैं।
मुफ्त टमाटर लेने उमड़ी भीड़
जैसे ही किसानों ने मुफ्त वितरण की घोषणा की, बाजार में लोगों की भीड़ लग गई। लोग बोरियों और टोकरियों में भरकर टमाटर ले गए।
एक तरफ जहां उपभोक्ता मुफ्त फसल पाकर खुश दिखे, वहीं दूसरी ओर किसानों की आंखों में अपनी मेहनत की बर्बादी के आंसू थे।
MSP जैसी व्यवस्था की मांग
किसानों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही टमाटर के लिए न्यूनतम लाभकारी मूल्य (MSP जैसी व्यवस्था) सुनिश्चित नहीं की, तो वे कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे।
यह मुफ्त वितरण सिर्फ एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ एक हताश किसान की पुकार है।
