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साइबर सुरक्षा से लेकर जनकल्याण तक, योगी सरकार के प्रयासों को मिली नई पहचान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में डिजिटल सुरक्षा, महिला एवं बाल संरक्षण और बेहतर लोक प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आई हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 104.28 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर प्रदेश साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर (UP-CSOC) की स्थापना को मंजूरी दी गई है।

वहीं, यूपी पुलिस ने ऑनलाइन शोषण और उत्पीड़न के मामलों में फंसे 24 बच्चों को रेस्क्यू किया है। इसके अलावा भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए) की उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय शाखा को वर्ष 2025-26 के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ शाखा का पुरस्कार देने की स्वीकृति मिली है।

तीनों पहलें प्रदेश में सरकारी डिजिटल व्यवस्था की सुरक्षा, साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई और लोक प्रशासन से जुड़े संस्थागत प्रयासों को मजबूती देने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।

 104.28 करोड़ से बनेगा साइबर सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर

प्रदेश के सरकारी डिजिटल ढांचे को साइबर हमलों और डेटा चोरी से सुरक्षित बनाने के लिए यूपी-CSOC की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। परियोजना की कुल अनुमानित लागत जीएसटी सहित 104.28 करोड़ रुपये है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, इस केंद्र की स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी आईआईटी कानपुर के साइबर सिक्योरिटी इनोवेशन हब C3iHub को देने का प्रस्ताव है।

यह केंद्र प्रदेश के स्टेट डेटा सेंटर, उत्तर प्रदेश स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (UPSWAN), सरकारी एप्लिकेशन और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल परिसंपत्तियों की चौबीसों घंटे निगरानी करेगा। किसी संदिग्ध गतिविधि, साइबर हमले या डेटा सेंधमारी की स्थिति में समय रहते खतरे की पहचान कर जरूरी कार्रवाई की जा सकेगी।

केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, थ्रेट इंटेलिजेंस और आधुनिक साइबर सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। नेक्स्ट जनरेशन फायरवॉल, सिक्योरिटी इन्फॉर्मेशन एंड इवेंट मैनेजमेंट, नेटवर्क डिटेक्शन एंड रिस्पॉन्स और वेब एप्लिकेशन फायरवॉल जैसी व्यवस्थाएं साइबर खतरों की पहचान और नियंत्रण में मदद करेंगी।

परियोजना के तहत तीन साल तक संचालन, तकनीकी सहायता और साइबर घटनाओं पर प्रतिक्रिया की व्यवस्था रहेगी। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की तैनाती के साथ सरकारी विभागों के अधिकारियों को प्रशिक्षण, साइबर ड्रिल और सुरक्षा संबंधी तैयारियों में भी सहयोग दिया जाएगा। व्यवस्था की समीक्षा के लिए थर्ड-पार्टी सिक्योरिटी ऑडिट की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

 ऑनलाइन उत्पीड़न में फंसे 24 बच्चों का रेस्क्यू

साइबर सुरक्षा के साथ महिला और बाल संरक्षण के मोर्चे पर भी यूपी पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस मुख्यालय के साइबर क्राइम विभाग के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं और शिकायतों के विश्लेषण के आधार पर ऑनलाइन शोषण और उत्पीड़न में फंसे 24 बच्चों को रेस्क्यू किया गया।

इन मामलों में अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) की साइबर टिपलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल से मिली सूचनाएं शामिल हैं। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की संबंधित इकाई इन शिकायतों का विश्लेषण कर राज्यों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों तक पहुंचाती है।

उत्तर प्रदेश साइबर मुख्यालय प्राप्त सूचनाओं की जांच कर संबंधित जिलों और पुलिस आयुक्तों को कार्रवाई के लिए भेजता है। जिला स्तर पर शिकायतों का सत्यापन किया जाता है। प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाए जाने पर नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज की जाती है। इसके बाद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच, आरोपितों की गिरफ्तारी और न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल करने की कार्रवाई की जाती है।

पुलिस के अनुसार, कुछ मामलों में साइबर अपराधी बच्चों की आपत्तिजनक तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल कर उन्हें ब्लैकमेल करते हैं। व्हाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, स्नैपचैट और ईमेल जैसे डिजिटल माध्यमों के जरिए भी ऐसे अपराध किए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में समय पर शिकायत, तकनीकी जांच और पीड़ित बच्चों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन अपराधों की शिकायत की जा सकती है। बच्चों और महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों पर कार्रवाई के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय भी किया जा रहा है।

 आईआईपीए की यूपी शाखा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

इसी बीच, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय शाखा ने भी राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के राष्ट्रीय मुख्यालय ने शाखा को वर्ष 2025-26 के लिए सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय/स्थानीय शाखा का पुरस्कार देने की स्वीकृति दी है।

यह पुरस्कार लोक प्रशासन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य, संस्थागत प्रतिबद्धता और जनहित से जुड़े विषयों में योगदान के लिए दिया जा रहा है।

लखनऊ में संचालित आईआईपीए की उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय शाखा लोक प्रशासन, सुशासन और जनभागीदारी से जुड़े विषयों पर काम करती है। शाखा के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त मुख्य सचिव आर. रामनी के नेतृत्व में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों, सदस्यों, कर्मचारियों और इंटर्न विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों को इस उपलब्धि का आधार बताया गया है।

संस्थान के राष्ट्रीय मुख्यालय की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, पुरस्कार 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित आईआईपीए परिसर में आयोजित वार्षिक आमसभा की बैठक में भारत के उपराष्ट्रपति एवं आईआईपीए के अध्यक्ष द्वारा प्रदान किया जाएगा।

शाखा के मानद सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी के. रविंदर नाइक ने इस उपलब्धि को सदस्यों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।

 सुरक्षा और सुशासन पर जोर

उत्तर प्रदेश में साइबर सुरक्षा केंद्र की स्थापना, ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में बच्चों को सुरक्षित करने के लिए पुलिस की कार्रवाई और आईआईपीए की क्षेत्रीय शाखा को मिला राष्ट्रीय सम्मान अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी उपलब्धियां हैं।

साइबर सेंटर से सरकारी डिजिटल प्रणालियों की निगरानी मजबूत करने, पुलिस की कार्रवाई से बच्चों के संरक्षण और साइबर अपराधों की जांच को गति देने तथा आईआईपीए के सम्मान से लोक प्रशासन से जुड़े सं स्थागत प्रयासों को पहचान मिलने की उम्मीद है।

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