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यूपी में अब IAS नहीं, वरिष्ठ डॉक्टर बनेंगे DGME! हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रक्रिया शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (DGME) के पद पर अब आईएएस अधिकारी के बजाय वरिष्ठ चिकित्सक-प्रधानाचार्य की तैनाती का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राजकीय मेडिकल कॉलेजों के नियमित प्रधानाचार्यों की अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी कर दी है। प्रधानाचार्यों से सात दिन के भीतर आपत्तियां मांगी गई हैं।

दरअसल, प्रदेश में DGME पद पर राजकीय मेडिकल कॉलेज के ऐसे प्रधानाचार्य को प्रोन्नति देकर तैनात किए जाने की व्यवस्था है, जो आयोग से चयनित और वरिष्ठतम हो। हालांकि वर्ष 2023 में नियमावली में संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया गया कि प्रधानाचार्य उपलब्ध न होने की स्थिति में सचिव रैंक से कम न होने वाले आईएएस अधिकारी को DGME के पद पर तैनात किया जा सकता है।

इसके बाद शासन स्तर पर लगातार इस पद पर आईएएस अधिकारियों की तैनाती होती रही। प्रधानाचार्यों ने इसे लेकर हाईकोर्ट का रुख किया और अपनी प्रोन्नति के साथ DGME पद पर तैनाती की मांग की।

मामले में हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया था कि प्रधानाचार्यों की सुनवाई किए बिना DGME पद पर आईएएस अधिकारी की तैनाती न की जाए। इसके बावजूद इस पद पर आईएएस नेहा शर्मा की तैनाती किए जाने के बाद प्रधानाचार्यों ने अवमानना याचिका दाखिल की।

कोर्ट ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि प्रधानाचार्यों की सुनवाई की जाए, अन्यथा मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के मुख्य सचिव और DGME को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ सकता है।

इसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई। दो सितंबर को प्रधानाचार्यों को प्रोन्नति देकर DGME पद पर तैनाती की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए। इसके तहत बुधवार को DGME नेहा शर्मा की ओर से राजकीय मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत नियमित प्रधानाचार्यों की अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी की गई।

7 नियमित प्रधानाचार्य कार्यरत

विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 13 राजकीय मेडिकल कॉलेजों के लिए प्रधानाचार्य के 13 पद स्वीकृत हैं। इनमें वर्तमान में 7 नियमित प्रधानाचार्य कार्यरत हैं।

जारी आदेश में कहा गया है कि अंतरिम वरिष्ठता सूची को लेकर किसी प्रधानाचार्य को आपत्ति है तो वह आदेश जारी होने की तारीख से 7 दिन के भीतर शासन को लिखित प्रत्यावेदन दे सकता है। निर्धारित समय में आपत्ति नहीं मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप देने की कार्रवाई की जाएगी।

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