रिपोर्ट- अभिषेक मिश्रा
कानपुर। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने UPI (यूपीआई) लेनदेन पर किसी भी तरह का टैक्स या शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं और प्रस्तावों का विरोध किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि डिजिटल भुगतान पर कर लगाने का विचार छोटे और मध्यम व्यापारियों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने सरकार से इस तरह के किसी भी प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र शुक्ला की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि प्रदेश अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि देश के व्यापारियों ने प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया और कैशलेस इकोनॉमी के अभियान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक ने तेजी से UPI को अपनाया है।
उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में कारोबारी और आम लोग रोजमर्रा के लेनदेन के लिए डिजिटल भुगतान पर निर्भर हैं। ऐसे में UPI पर किसी भी तरह का टैक्स या शुल्क लगाने का विचार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
कैशलेस इकोनॉमी को नुकसान की आशंका
लोकेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि UPI पर कर लगाने से व्यापारियों और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि डिजिटल लेनदेन पर शुल्क बढ़ने से लोग दोबारा नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं, जिससे कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के प्रयास प्रभावित होंगे।
उन्होंने सरकार से मांग की कि डिजिटल लेनदेन को मुफ्त और सुरक्षित बनाए रखा जाए और छोटे व्यापारियों पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ न डाला जाए।
प्रस्ताव वापस नहीं लिया तो आंदोलन की चेतावनी
व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने UPI पर कर लगाने के किसी भी प्रस्ताव को आगे बढ़ाया तो व्यापारी इसका विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर उत्तर प्रदेश के लाखों व्यापारी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
संगठन ने सरकार से डिजिटल भुगतान को लेकर व्यापारियों और आम जनता की चिंताओं पर ध्यान देने तथा UPI पर टैक्स या शुल्क लगाने के विचार को वापस लेने की मांग की है।
