हिमाचल में रेहड़ी-पटरी की दुकानों पर नाम या पहचान उजागर करने के मुद्दे पर राज्य सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सफ़ाई दी है.
उन्होंने मीडिया को कहा, “यह आज का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह 2013 से चल रहा है. तब सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया था कि नगरपालिका में टाउन वेंडिंग कमिटी बननी चाहिए. 2016 में हिमाचल प्रदेश में इस पर क़ानून को बनाया गया, जिसमें सरकार ने टाउन वेंडिंग कमिटी को बनाने का फ़ैसला किया था. मगर ये काफ़ी समय तक लागू नहीं हो पाया था.”
उनके मुताबिक़, “साल 2023 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने एक जनहित याचिका के ज़रिए हिमाचल प्रदेश सरकार को यह निर्देश दिया कि तत्काल प्रभाव से टाउन एंड वेडिंग कमिटी को बनाया जाए ताकि जितने प्रदेश के अंदर रेहड़ी-पटरी लगाने वाले हैं, उनको बैठने के लिए एक अधिकृत स्थान मिल सके. हमने इस विषय को आगे ले जाने का काम किया है.”
उन्होंने कहा कि ‘साफ़-सफ़ाई से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए इस पहचान की प्रक्रिया को लागू कर रहे हैं, जो कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार है.’
दो दिन पहले जब विक्रमादित्य सिंह ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तर्ज पर प्रदेश में रेहड़ी पटरी वाली दुकानों पर नेम प्लेट लगाना अनिवार्य किए जाने का एलान किया था तो प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी कर रोक लगा दी थी.
बीते कुछ दिनों से विक्रमादित्य सिंह प्रदेश की कांग्रेस सरकार को असहज करने वाले बयान दे रहे हैं. इसी सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने वक्फ़ बोर्ड के बिल के समर्थन में एक पोस्ट लिखा था.
इसी साल हुए लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च जब राज्य सभा चुनाव के लिए क्रॉस वोटिंग से सियासी तूफ़ान उठा तो उसमें भी विक्रमदित्य सिंह और उनकी मां प्रतिभा सिंह के बग़ावती तेवर दिखे थे.
