Homeउत्तर प्रदेशबाँके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी के दर्शन को लेकर विवाद, हाई...

बाँके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी के दर्शन को लेकर विवाद, हाई पावर्ड कमेटी का बयान

वृंदावन: बाँके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी के दर्शन को लेकर चल रहे विवाद ने अब खुलकर सामने आ गया है। मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह की बजाय जगमोहन से दर्शन कराने का फैसला लिया, जिससे गोस्वामी समाज के एक वर्ग और हाई पावर्ड कमेटी के बीच टकराव बढ़ गया है।

कमेटी ने की आपात बैठक

मंदिर में बढ़ती भीड़ और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए, कमेटी ने आपात बैठक बुलाई। बैठक के बाद कई अहम फैसले लिए गए। कमेटी अध्यक्ष और रिटायर्ड जज अशोक कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जगमोहन से दर्शन कराने का निर्णय श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया

विरोध का कारण

कुछ गोस्वामी का कहना है कि यह फैसला सदियों पुरानी परंपरा के खिलाफ है। उनका दावा है कि दर्शन केवल गर्भगृह से ही होने चाहिए। बीते दिन मंदिर परिसर में इस मुद्दे पर हंगामा और नारेबाजी भी हुई।

कमेटी का पक्ष

अशोक कुमार ने स्पष्ट किया कि हंगामा पूर्व नियोजित था। उन्होंने कहा कि कुछ गोस्वामी और उनके समर्थक जगमोहन पर चढ़ गए और विरोध शुरू कर दिया, ताकि कमेटी पर दबाव बनाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संबंधित गोस्वामियों को अंतिम चेतावनी दी गई है।

शाम के दर्शन और मीडिया एंट्री पर फैसले

  • श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शाम को भी जगमोहन से दर्शन कराने का निर्णय लिया गया।

  • मीडिया की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। अब पत्रकार मंदिर के अंदर वीडियो नहीं बना सकेंगे और बातचीत मुख्य द्वार पर ही होगी।

जंजीर और आसन को लेकर सफाई

  • गर्भगृह के दरवाजे पर जंजीर लगने के वीडियो को लेकर सवाल उठे, जिस पर कमेटी ने कहा कि यह भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया गया।

  • लकड़ी के जर्जर आसन पर ठाकुर जी विराजित करने के आरोप पर कहा गया कि अब ठाकुर जी चांदी के आसन पर जगमोहन में विराजमान हैं।

परंपरा पर विवाद

अशोक कुमार ने परंपरा तोड़ने के आरोप खारिज किए। उनके अनुसार, जगमोहन से दर्शन का प्रचलन पहले भी रहा है और ठाकुर जी की मर्जी के बिना कोई निर्णय नहीं होता

स्थिति अभी भी तनावपूर्ण

फिलहाल, हाई पावर्ड कमेटी, गोस्वामी समाज और श्रद्धालुओं के बीच मतभेद जारी हैं। कमेटी संवाद की बात कर रही है, जबकि विरोधी पक्ष इसे परंपरा से समझौता मान रहा है।

RELATED ARTICLES

Most Popular