लखनऊ। यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोगों को अब अवैध बिजली कनेक्शन के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन ने डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों को अस्थायी और सशर्त नियमित बिजली कनेक्शन देने का रास्ता तैयार किया है। मुख्यमंत्री की सहमति मिलते ही इस संबंध में आदेश जारी किया जाएगा।
दरअसल, वर्ष 2010 से यमुना-हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगी हुई है। तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता के करीब 16 वर्ष पुराने शासनादेश के चलते पावर कॉरपोरेशन ने गौतमबुद्धनगर के नोएडा और गाजियाबाद के छिजारसी, चोटपुर, शिव विहार, कनावटी समेत कई डूब क्षेत्रों में नए कनेक्शन जारी नहीं किए हैं।
13 हजार से अधिक घरों में बिजली चोरी
डूब क्षेत्र में निर्माण की अनुमति नहीं होने के बावजूद यहां हजारों मकान बन चुके हैं। जांच में सामने आया है कि डूब क्षेत्र की 13 हजार से अधिक संपत्तियों में अवैध कनेक्शन के जरिए बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी हो रही है।
स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने हाल ही में यह मामला मुख्यमंत्री के सामने रखा था। उनके मुताबिक, निजी व्यक्तियों के जरिए पूरे क्षेत्र में अवैध तरीके से बिजली की आपूर्ति की जा रही है और इसके बदले लोगों से 11 रुपये प्रति यूनिट तक वसूले जाने की शिकायत सामने आई है।
बिजली चोरी से हर साल 16 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
आयोग के मुताबिक, डूब क्षेत्र में हो रही अवैध बिजली आपूर्ति के कारण हर साल 16 करोड़ रुपये से अधिक की बिजली चोरी का मामला सामने आया है। यह भी बताया गया कि विद्युत वितरण निगम के कुछ कार्मिकों की मिलीभगत से कथित रूप से हो रही इस वसूली का पैसा पावर कॉरपोरेशन तक नहीं पहुंच रहा है।
मामले पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए डूब क्षेत्र के लोगों को वैध तरीके से बिजली कनेक्शन देने का रास्ता तलाशने के निर्देश दिए थे।
कैंप लगाकर दिए जाएंगे अस्थायी कनेक्शन
मनोज कुमार सिंह के अनुसार, बिजली को मूलभूत आवश्यकता मानते हुए न्यायालय और प्रशासनिक आदेशों के साथ ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट समेत सभी पहलुओं पर विचार किया गया है। इसके बाद सशर्त बिजली कनेक्शन देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
जब तक डूब क्षेत्र में हुए अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक वहां के निवासियों को अंतरिम तौर पर अस्थायी नियमित बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में कैंप भी लगाए जाएंगे।
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम और नोएडा पावर कंपनी अपने-अपने क्षेत्र में दिए जाने वाले कनेक्शनों का अलग-अलग पूरा रिकॉर्ड रखेंगे।
कनेक्शन से मालिकाना हक नहीं मिलेगा
नए कनेक्शन के लिए संपत्ति के निवासी या कब्जाधारी को बिजली नेटवर्क के विकास और कनेक्शन की लागत का खर्च उठाना होगा। इसके साथ ही स्पष्ट शर्त होगी कि बिजली कनेक्शन को संपत्ति पर किसी तरह के वैधानिक अधिकार या स्वामित्व का प्रमाण नहीं माना जाएगा।
यदि अदालत या प्रशासन के आदेश पर संबंधित परिसर को खाली करने का निर्देश दिया जाता है तो उपभोक्ता को संपत्ति खाली करनी होगी।
निर्माण हटने पर बिना पूछे काटा जा सकेगा कनेक्शन
प्रशासन की ओर से यदि डूब क्षेत्र में बने निर्माण को हटाया जाता है तो बिजली कनेक्शन काटने के लिए उपभोक्ता से अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
इसके अलावा बाढ़ की स्थिति में संपत्ति को हुए नुकसान के लिए बिजली उपभोक्ता मुआवजे की मांग नहीं कर सकेगा। पर्यावरणीय क्षति या उससे जुड़े किसी मुआवजे का भुगतान भी संबंधित उपभोक्ता को ही करना होगा।
बिजली चोरी और हादसों पर लगेगा अंकुश
आयोग के सीईओ मनोज कुमार सिंह का कहना है कि डूब क्षेत्र में व्यवस्थित बिजली नेटवर्क विकसित कर वैध कनेक्शन देने से बिजली चोरी पर रोक लगाने के साथ विद्युत दुर्घटनाओं को भी कम किया जा सकेगा। इससे लोगों को अवैध आपूर्ति के लिए निजी लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें बिजली के लिए ज्यादा कीमत भी नहीं चुकानी होगी।
