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परिवार बचाने के लिए लोकतंत्र बचाने का नाटक कर रहे कांग्रेस-सपा: सीएम योगी

लखनऊ/गाजियाबाद, 5 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस और सपा का अभियान लोकतंत्र बचाने का नहीं, बल्कि अपना परिवार बचाने का है। दोनों दल परिवारवादी राजनीति के प्रतीक बन चुके हैं। एक ही परिवार के लोग पार्टी के अध्यक्ष बनते हैं और पूरी पार्टी उसी परिवार को आगे बढ़ाने में जुटी रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव जीतने पर कांग्रेस अपनी जीत का श्रेय खुद लेती है, लेकिन हारने पर ईवीएम, निर्वाचन आयोग और एसआईआर पर सवाल उठाने लगती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लोकतंत्र के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। अपनी राजनीतिक विफलताओं पर आत्ममंथन करने के बजाय संस्थाओं पर आरोप लगाना विपक्ष की आदत बन गई है।

राहुल गांधी पर छात्र का उदाहरण देकर कसा तंज

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना ऐसे छात्र से की, जो बार-बार परीक्षा में फेल होने के बाद अपनी गलतियां स्वीकार करने के बजाय बहाने बनाता है। उन्होंने कहा कि कभी छात्र मास्टर पर कॉपी बदलने का आरोप लगाता है, कभी प्रश्नपत्र को पाठ्यक्रम से बाहर बताता है, तो कभी पेन की स्याही खत्म होने की बात कहता है। इसी तरह कांग्रेस के नेता भी अपनी हार का ठीकरा कभी ईवीएम तो कभी निर्वाचन आयोग पर फोड़ते हैं।

कांग्रेस के घोटालों और सपा के शासन पर साधा निशाना

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में कॉमनवेल्थ, 2जी, कोयला और उर्वरक जैसे बड़े घोटाले सामने आए। भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से परेशान जनता ने वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को नई दिशा देने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा की सरकारों में उत्तर प्रदेश की पहचान दंगे, कर्फ्यू और गुंडागर्दी से होने लगी थी। बेटियां और व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस करते थे। कोसीकलां, मुजफ्फरनगर, मथुरा, बरेली, संभल, मुरादाबाद, बुलंदशहर, मेरठ और सहारनपुर की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने सपा शासन की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाली सपा आज लोकतंत्र की बात कर रही है।

आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस दे रही लोकतंत्र की दुहाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1975 में देश पर आपातकाल थोपने वाली कांग्रेस आज लोकतंत्र बचाने की बात कर रही है। उन्होंने वर्ष 1984 की सिख विरोधी हिंसा का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। साथ ही आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध किया और रामभक्तों के रास्ते में बाधाएं खड़ी कीं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है और देश में विरासत के साथ विकास को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

2014 के बाद बदली देश की तस्वीर

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश आतंकवाद, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार और कमजोर अर्थव्यवस्था जैसी चुनौतियों से जूझ रहा था। आज भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। दिल्ली-मेरठ के बीच रैपिड रेल का संचालन हो रहा है और देश के 20 से अधिक शहरों में मेट्रो पहुंच चुकी है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 55 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ और चार करोड़ गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराए हैं। इसके अलावा 12 करोड़ घरों में शौचालय और 10 करोड़ घरों में रसोई गैस कनेक्शन दिए गए हैं। किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं के जरिए किसानों को भी लाभ पहुंचाया जा रहा है।

100 स्थानों पर निकाली गईं पदयात्राएं

मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के आह्वान पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की कथित अराजकता के खिलाफ देशभर में जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। पांच नवंबर को देश के 100 स्थानों पर पदयात्राएं आयोजित की गईं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि है और सभी राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए।

कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, सह प्रभारी अनंत ओझा, राज्यसभा सांसद रामप्रताप सिंह चौहान, क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर, मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह, सुनील शर्मा, गुलाब देवी, बलदेव सिंह औलख, कपिल देव अग्रवाल, नरेंद्र कश्यप, सोमेंद्र तोमर, जसवंत सिंह सैनी, दिनेश खटीक, केपी मलिक, सांसद डॉ. महेश शर्मा, लक्ष्मीकांत बाजपेयी, अतुल गर्ग, सुरेंद्र नागर, सुरेश राणा, नीरज सिंह, मोहित बेनीवाल और रालोद के राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी सहित कई नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।

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