Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर अपने संवेदनशील और जवाबदेह शासन का उदाहरण पेश किया है। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग ₹860 करोड़ की आर्थिक सहायता जरूरतमंदों तक पहुंचाई गई है, जिससे 50 हजार से अधिक लाभार्थियों को राहत मिली।
हर वर्ग तक पहुंची मदद, बिना भेदभाव
सरकार की इस पहल की सबसे बड़ी खासियत रही—समानता और निष्पक्षता। शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में सहायता
सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों के अनुरोधों पर कार्रवाई गरीब, मरीज, दुर्घटना पीड़ित—हर जरूरतमंद तक मदद यह स्पष्ट करता है कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण के साथ राहत पहुंचाना है।
छोटी से बड़ी जरूरत तक समाधान
₹50,000 जैसी छोटी सहायता से लेकर ₹3 करोड़ से अधिक की बड़ी सहायता तक स्वीकृति अयोध्या, अमेठी, बाराबंकी, आजमगढ़, बलिया और फिरोजाबाद जैसे जिलों में बड़े मामलों के चलते अधिक धनराशि दी गई।
जनप्रतिनिधियों से मजबूत जुड़ाव
इस योजना की खास बात यह रही कि: सभी दलों के विधायक सांसदों की सक्रिय भागीदारी हर अनुरोध पर समान गंभीरता से कार्रवाई स्थानीय स्तर पर विश्वास और जवाबदेही मजबूत हुई
जहां जरूरत, वहां सहायता” की नीति
सरकार ने कोटा सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया:
जहां ज्यादा जरूरत, वहां ज्यादा सहायता वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर फंड आवंटन गंभीर बीमारियों और आपात स्थितियों में तुरंत राहत
त्वरित प्रक्रिया से मिली जीवनरक्षक मदद
आवेदन से स्वीकृति तक प्रक्रिया तेज और सरल हजारों मरीजों को समय पर इलाज संभव हुआ कई मामलों में यह सहायता जीवन बचाने वाली साबित हुई ।
सरकार का संवेदनशील चेहरा
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष आज:गरीब और जरूरतमंदों के लिए तत्काल राहत तंत्र आर्थिक संकट में फंसे परिवारों के लिए सहारासरकार के प्रति जनता का भरोसा मजबूत करने वाला माध्यम बन चुका है
कैसे मिलती है सहायता?
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से सहायता पाने के लिए:
MLA/MP के माध्यम से या सीधे आवेदन जरूरी दस्तावेज: मेडिकल रिपोर्ट, आय प्रमाण, खर्च का अनुमान
जांच के बाद जरूरत के अनुसार राशि स्वीकृत
