प्रदेश में गोवंश संरक्षण को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है।
भूसा और साइलेज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसका असर भी देखने को मिल रहा है—कई जिलों में टेंडर प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है, जबकि 6 जिलों में साइलेज टेंडर पूरी तरह संपन्न हो चुके हैं
सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि गोआश्रय स्थलों पर चारे की किसी भी प्रकार की कमी न होने पाए। विशेष रूप से गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए भूसा और साइलेज के पर्याप्त भंडारण पर जोर दिया जा रहा है। शासन स्तर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों बनी रहें।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जिन जिलों में साइलेज टेंडर पूरे हो चुके हैं, वहां जल्द ही आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। वहीं अन्य जिलों में प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की सख्ती के चलते इस बार टेंडर प्रक्रिया में देरी नहीं हो रही है
सरकार ने 15 अप्रैल से विशेष भूसा संग्रह अभियान शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। इस अभियान के तहत दान और क्रय दोनों माध्यमों से भूसा एकत्र किया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक गो-आश्रय स्थल की 4 किलोमीटर परिधि में स्थित गोचर भूमि को जोड़कर चारा आच्छादन का विस्तार किया जाएगा।
एक अहम पहल के रूप में सरकार किसानों से सीधे भूसा खरीद को भी बढ़ावा दे रही है। इससे गोआश्रय स्थलों को समय पर चारा उपलब्ध होगा और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा। इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।
सरकार के इस सक्रिय और सख्त रुख से प्रदेश के गोआश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद है। समय पर चारा उपलब्ध होने से पशुओं की देखभाल बेहतर होगी और किसानों को भी आर्थिक लाभ मिलेग
