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68,500 शिक्षक भर्ती को लेकर फिर प्रदर्शन, अभ्यर्थियों ने उठाई संशोधित सूची और नियुक्ति की मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी आरक्षण और अर्हता अंकों को लेकर लंबे समय से अपनी मांगें उठा रहे हैं। हाल के दिनों में लखनऊ में प्रदर्शन कर अभ्यर्थियों ने सरकार से मामले का समाधान करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की।

29 सितंबर को प्रदर्शनकारी कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास के बाहर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की भी खबर सामने आई। बाद में मंत्री ने कुछ अभ्यर्थियों से बातचीत की।

आठ साल से लंबित है मामला

68,500 सहायक शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी। इसके बाद आरक्षण और न्यूनतम अर्हता अंकों को लेकर विवाद सामने आया। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार मिलने वाली पांच प्रतिशत अर्हता छूट का लाभ नहीं मिला।

अभ्यर्थियों की मांग है कि इस आधार पर परिणाम की दोबारा समीक्षा की जाए, संशोधित चयन सूची जारी हो और जिन अभ्यर्थियों को पात्र माना जाता है, उन्हें नियुक्ति दी जाए।

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति बनी मुद्दे का केंद्र

इस मामले में उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की जून 2026 में हुई बैठक के बाद जारी संस्तुति भी महत्वपूर्ण है। आयोग ने 2018 की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में ओबीसी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत अर्हता अंक की छूट देने संबंधी अपनी पूर्व संस्तुति को बरकरार रखा।

आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से परिणाम में संशोधन करने और 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत प्राप्त करने वाले ओबीसी अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण मानते हुए उनकी सूची उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी।

आयोग ने यह भी कहा था कि संबंधित प्रावधानों और उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा में ऐसी कोई कानूनी रोक सामने नहीं आई, जो इस छूट को लागू करने से रोकती हो। साथ ही आयोग ने अपनी पूर्व संस्तुति पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की थी।

मंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन

29 सितंबर को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी ओम प्रकाश राजभर के आवास पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण से जुड़े मुद्दे को हल करने, आयोग की संस्तुति लागू करने और नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अभ्यर्थियों को वहां से हटाने का प्रयास किया, जिसके बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी मुख्य रूप से इन मांगों को उठा रहे हैं—

  • आरक्षण से जुड़ी कथित विसंगतियों का समाधान किया जाए।
  • राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति पर कार्रवाई की जाए।
  • ओबीसी अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत अर्हता छूट का लाभ दिया जाए।
  • 150 में 60 अंक के आधार पर पात्र ओबीसी अभ्यर्थियों के परिणाम की समीक्षा की जाए।
  • संशोधित चयन सूची जारी की जाए।
  • संशोधित परिणाम के आधार पर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए।

अब शासन के फैसले पर नजर

68,500 शिक्षक भर्ती का विवाद कई वर्षों से अभ्यर्थियों के आंदोलन का मुद्दा बना हुआ है। आयोग की 2026 की संस्तुति के बाद अभ्यर्थियों ने एक बार फिर सरकार से इस मामले में स्पष्ट निर्णय लेने की मांग तेज कर दी है।

फिलहाल भर्ती के संशोधित परिणाम और नियुक्ति को लेकर आगे की कार्रवाई शासन और बेसिक शिक्षा विभाग के स्तर पर होने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी। अभ्यर्थी आयोग की संस्तुति लागू कराने और अपने मामले के निस्तारण की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं।

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