चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी के सैन्य अभ्यास का मक़सद ताइवान को धमकाना है. बीजिंग ने बहुत पहले क़सम खाई थी कि वो ताइवान को महाद्वीप में मिलाकर रहेगा, अगर ज़रूरत पड़ी तो वो इसके लिए बल प्रयोग भी करेगा.दरअसल, चीन में चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना को 2049 में सौ साल पूरे होंगे. चीन की कोशिश इस शताब्दी वर्ष से पहले ताइवान को महाद्वीप में शामिल करने की है.
आदर्श रूप में, तो यह ऐसे होगा, जहां गुस्से से एक भी गोली नहीं चलाई जाएगी और ताइपे स्वेच्छा से चीन के सामने समर्पण कर देगा, मगर ताइवान की जनसंख्या ने हाल ही में हॉन्ग कॉन्ग में लोकतंत्र के दमन को देखा है, और इसके बाद से ज़्यादातर लोग इस बात के लिए इच्छुक नहीं हैं कि उन पर किसी एक कम्युनिस्ट पार्टी का शासन रहे.दरअसल, बीजिंग की यह प्रतिक्रिया ताइवान को चीन की रणनीतिक श्रेष्ठता की याद दिलाना है.
हाल ही में चीन ने सभी इलाक़ों में बड़े स्तर पर सैन्य तैनाती की थी.इनमें हाइपरसोनिक मिसाइल, एयरक्राफ्ट कैरियर्स, परमाणु हथियार और पाँचवीं जनरेशन के लड़ाकू एयरक्राफ्ट शामिल हैं.पीएलए नेवी अब दुनिया में सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी है. और यह लगातार बढ़ रही है.
बावजूद इसके बड़े स्तर पर ताइवान पर हमला चाइनीज़ कम्युनिस्ट पार्टी के लिए आख़िरी सहारा होगा. क्योंकि, इसमें बहुत ज़्यादा ख़र्च होगा. और वैश्विक अर्थव्यवस्था को यह कदम जन शक्ति और आर्थिक तौर पर नुक़सान पहुंचाएगा.बीजिंग के लिए एक बड़ा अज्ञात तथ्य यह भी है कि ताइवान को बचाने के लिए अमेरिका अभी तक कितना तैयार है?
