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पीएम मोदी के इज़राइल दौरे पर मौलाना नक़वी ने उठाए फ़िलिस्तीन मुद्दे के सवाल

लखनऊ — मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़राइल दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति की ऐतिहासिक बुनियाद फ़िलिस्तीन के समर्थन पर रही है। उन्होंने कहा कि आज़ाद भारत के इतिहास में नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो इज़राइल के दौरे पर गए।

गांधी और वाजपेयी का हवाला

मौलाना ने महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि फ़िलिस्तीन अरबों का है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री को अपने दौरे के दौरान फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों का ज़िक्र करना चाहिए था।

उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल की ओर से मिले उच्च सम्मान पर उन्हें अफ़सोस है और इसे उन्होंने एक “ज़ालिम सरकार” की तरफ़ से दिया गया सम्मान बताया।

इज़राइली संसद में भाषण पर टिप्पणी

मौलाना कल्बे जवाद नक़वी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इज़राइली संसद में अपने भाषण में “बेगुनाह नागरिकों की हत्या किसी भी बहाने से जायज़ नहीं” जैसे महत्वपूर्ण शब्द कहे, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि ग़ाज़ा में जारी कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि जिस तरह हमास की आलोचना की गई, उसी तरह इज़राइल की कार्रवाई की भी निंदा होनी चाहिए थी।

ग़ाज़ा और हमास पर आरोप-प्रत्यारोप

मौलाना ने दावा किया कि ग़ाज़ा में बच्चों, महिलाओं और युवाओं की मौत के कई प्रमाण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हमास के खिलाफ लगाए गए आरोपों के ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किए गए हैं।

(नोट: इज़राइल-हमास संघर्ष को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग आकलन मौजूद हैं।)

अमेरिका और ईरान पर भी टिप्पणी

मौलाना ने अमेरिका द्वारा ईरान से तेल ख़रीदने पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र की ओर से कोई प्रतिबंध नहीं है, तो भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों को स्वीकार नहीं करना चाहिए।

उन्होंने अमेरिकी न्यायपालिका के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहना चाहिए।

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