लखनऊ। प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर लागू की गई वर्टिकल रीस्ट्रक्चरिंग पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अब विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त करने की मांग की है।
इससे पहले विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेई और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर भी इस व्यवस्था को खत्म करने की मांग कर चुके हैं।
उपभोक्ताओं के हित में निर्णय की मांग
संघर्ष समिति का कहना है कि वर्टिकल व्यवस्था को प्रतिष्ठा का विषय न बनाया जाए और उपभोक्ताओं के हित को प्राथमिकता देते हुए इसे तत्काल समाप्त किया जाए। समिति के अनुसार, यह व्यवस्था अब बिजली आपूर्ति की सुचारु प्रणाली के लिए खतरा बनती जा रही है।
बड़े शहरों में बढ़ी चिंता, गर्मियों से पहले चेतावनी
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार लखनऊ और अयोध्या सहित कई बड़े शहरों में लागू यह व्यवस्था अब गंभीर चुनौती बन चुकी है।आगामी भीषण गर्मियों को देखते हुए चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते इसे समाप्त नहीं किया गया, तो बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
मेरठ से शुरू हुआ विवाद
समिति ने बताया कि 12 सितंबर 2025 को मेरठ में इस व्यवस्था के लागू होने के बाद से ही अव्यवस्थाएं सामने आने लगी थीं। उस समय भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी और इसे खत्म करने के निर्देश दिए गए थे।
संविदा कर्मियों की छंटनी से बढ़ी समस्या
संघर्ष समिति का आरोप है कि वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर कम वेतन वाले संविदा कर्मियों की बड़े स्तर पर छंटनी की जा रही है और नियमित पदों को समाप्त किया जा रहा है।
समिति का कहना है कि गर्मियों में बिजली की मांग 36,000 मेगावाट से अधिक पहुंच सकती है, ऐसे में अनुभवी कर्मचारियों की जरूरत थी, लेकिन इसके उलट व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। इससे कर्मचारी दबाव में हैं और उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं।
प्रीपेड मीटर भी बने परेशानी का कारण
संघर्ष समिति के अनुसार प्रीपेड मीटर प्रणाली भी उपभोक्ताओं के लिए नई समस्याएं पैदा कर रही है, जिससे उनकी दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
निजीकरण के खिलाफ तेज हुआ आंदोलन
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में भी आंदोलन तेज हो गया है। बिजली कर्मियों ने अवकाश के दिन भी जनसंपर्क अभियान चलाकर अपनी मांगों को जनता तक पहुंचाया।
गर्मियों में संकट की आशंका
संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वर्टिकल व्यवस्था समाप्त नहीं की गई और हटाए गए संविदा कर्मियों को वापस नहीं लिया गया, तो आने वाली गर्मियों में बिजली संकट की पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।
