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महाशिवरात्रि पर बनी अनोखी प्रेम कहानी: विज्ञान और अध्यात्म का संगम…

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई जिसने न केवल दिलों को छुआ, बल्कि युवाओं के बीच अध्यात्म और विज्ञान के अनूठे मेल की मिसाल भी पेश की।

पहली मुलाकात से जीवनसाथी बनने तक

कोयंबटूर के एक आश्रम में महाकुंभ 2025 के दौरान अभय सिंह और प्रतीका की पहली मुलाकात हुई।अभय, आईआईटी मुंबई से एयरोस्पेस इंजीनियर हैं प्रतीका, खगोल विज्ञान की शोधार्थी हैं दोनों की सोच, अध्यात्म के प्रति रुचि और जीवन दृष्टिकोण एक जैसा था—यही उनकी कनेक्शन की सबसे बड़ी वजह बना।

प्रस्ताव और फिर विवाह

पहली मुलाकात के अगले ही दिन, महाशिवरात्रि पर अभय ने प्रतीका को शादी के लिए प्रपोज किया।
शुरुआत में यह मज़ाक लगा, लेकिन समय के साथ यह रिश्ता गहराता गया।लगभग एक साल तक दोनों संपर्क में रहे
एक-दूसरे को समझने के बाद परिवार की सहमति मिली15 फरवरी को मंदिर में पारंपरिक विवाह हुआ इसके बाद कोर्ट मैरिज भी की गई

 परंपरा और अपनापन

विवाह के बाद नवविवाहित जोड़ा अपने पैतृक गांव सासरौली पहुंचा, जहां उनका पारंपरिक स्वागत हुआ।
प्रतीका, जो कर्नाटक से हैं, उनके परिवार ने भी पूरे रीति-रिवाज से गृह प्रवेश कराया।

विज्ञान और अध्यात्म का संगम

अभय सिंह की खास पहचान उनके अनोखे दृष्टिकोण से बनी।उन्होंने क्वांटम फिजिक्स न्यूरोसाइंस जैसे विषयों के माध्यम से धर्म और अध्यात्म को तार्किक रूप में समझाने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर उनकी सरल भाषा और वैज्ञानिक व्याख्या ने युवाओं को खासा प्रभावित किया।

युवाओं के लिए प्रेरणा

यह कहानी सिर्फ प्रेम नहीं, बल्कि एक संदेश है— विज्ञान और अध्यात्म विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं
समझ, सम्मान और संवाद से रिश्ते मजबूत बनते हैं अभय और प्रतीका की यह यात्रा आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है, जो दिखाती है कि सच्चा प्रेम सोच, विश्वास और मूल्यों के मेल से बनता है।

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