Homeउत्तर प्रदेशलखनऊ में आज आस्था का महाकुंभ: 1000 से अधिक भंडारे

लखनऊ में आज आस्था का महाकुंभ: 1000 से अधिक भंडारे

 

लखनऊ में आज ज्येष्ठ माह के पहले बड़े मंगल के अवसर पर आस्था और श्रद्धा का भव्य नज़ारा देखने को मिल रहा है। पूरे शहर में 1000 से अधिक भंडारे लगाए गए हैं, जहां लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद, जल और भोजन की व्यवस्था की गई है। राजधानी का हर प्रमुख मार्ग और मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है।

नगर निगम लखनऊ ने इस आयोजन को देखते हुए व्यापक तैयारियां की हैं। अब तक 348 भंडारा आयोजकों ने आधिकारिक रजिस्ट्रेशन कराया है। नगर निगम द्वारा सभी पंजीकृत भंडारों को मुफ्त में स्वच्छ पानी, सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन की सुविधा दी जा रही है। इसके लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं जो आयोजन स्थल पर लगातार निगरानी कर रही हैं।

नगर निगम ने “वन ऐप” के जरिए भंडारा रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई है, जिससे आयोजक आसानी से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। साथ ही, सूखा और गीला कचरा अलग-अलग एकत्र करने के लिए डस्टबिन लगाए गए हैं और आयोजन के बाद विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा।

 ट्रैफिक व्यवस्था और रूट डायवर्जन

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने सोमवार रात 12 बजे से रूट डायवर्जन लागू कर दिया है, जो आयोजन समाप्त होने तक जारी रहेगा। खासतौर पर हनुमान सेतु, अलीगंज और हजरतगंज जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारी भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और दो बटालियन PAC की तैनाती की गई है।

ITMS और CCTV कैमरों के जरिए पूरे शहर की निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

 इस साल 8 बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग

इस बार ज्येष्ठ माह में मलमास पड़ने के कारण कुल 8 बड़े मंगल मनाए जा रहे हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन हनुमान जी के वृद्ध स्वरूप की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

हजरतगंज स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मंदिर में देर रात से ही भक्त दर्शन और परिक्रमा कर रहे हैं।

 धार्मिक मान्यताएं और परंपरा

लखनऊ में बड़े मंगल की परंपरा बेहद प्राचीन मानी जाती है। मान्यता है कि अलीगंज क्षेत्र में हनुमान जी की मूर्ति खुदाई में प्राप्त हुई थी और तभी से यहां भव्य मंदिर की स्थापना हुई। इसके बाद शहर में बड़े मंगल पर भंडारे करने की परंपरा शुरू हुई।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, महामारी के समय लोगों ने हनुमान जी से प्रार्थना की थी, जिसके बाद रोगों का अंत हुआ और तब से हर ज्येष्ठ मंगलवार को भंडारों की परंपरा शुरू हो गई।

पर्यावरण संरक्षण पर जोर

नगर आयुक्त गौरव कुमार ने आयोजकों से अपील की है कि भंडारों में प्लास्टिक और थर्माकोल का उपयोग न किया जाए। इसके बजाय पत्तलों और मिट्टी के कुल्हड़ का प्रयोग करने को कहा गया है ताकि धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।इसके अलावा, लाउडस्पीकर का उपयोग भी निर्धारित मानकों के अनुरूप ही करने के निर्देश दिए गए हैं।

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