बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने महाराष्ट्र में बढ़ती ‘बुलडोजर कार्रवाई’ पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि “बुलडोजर संस्कृति को महाराष्ट्र में घुसने मत दीजिए। यह यूपी या बिहार नहीं है।” कोर्ट की यह टिप्पणी छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम द्वारा कथित अवैध निर्माणों पर की गई कार्रवाई को लेकर आई है।
मामला AIMIM पार्षद मतीन पटेल और हनीफ खान से जुड़ी संपत्तियों को गिराने का है। कोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किए बिना मनमाने तरीके से मकान तोड़े गए। जस्टिस सिद्धेश्वर टी. की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी का घर बनाना आसान नहीं होता और ऐसी कार्रवाई से पूरा परिवार बेघर हो जाता है।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक तोड़फोड़ से पहले 15 दिन का नोटिस देना जरूरी है, लेकिन इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया। बेंच ने सवाल उठाया कि क्या नगर निगम ने यह जांच की थी कि इमारत का कौन सा हिस्सा अवैध था और उसी हिस्से पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी।
नगर निगम की ओर से पेश सरकारी वकील संभाजी टोपे ने अदालत में कहा कि याचिकाएं अब निरर्थक हो चुकी हैं क्योंकि इमारतें पहले ही गिराई जा चुकी हैं। उन्होंने याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत में सिविल उपाय तलाशने की सलाह दी।
बताया गया कि 13 मई को नगर निगम ने मतीन पटेल के घर और कार्यालय पर बुलडोजर चलाया था। इसके साथ ही एक अन्य मकान को भी गिरा दिया गया, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर एक वांछित आरोपी कर रहा था। कार्रवाई के बाद विवाद तब बढ़ गया जब आसपास की कुछ अन्य संपत्तियों को भी बिना पूर्व सूचना के तोड़ दिया गया। इनमें अमजद खान की निर्माण सामग्री की दुकान और पटेल के पिता के नाम का मकान भी शामिल था।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।
