लखनऊ विश्वविद्यालय के नव-नियुक्त कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी से हाल ही में हुई आत्मीय मुलाकात ने शिक्षा, नेतृत्व और भविष्य की संभावनाओं को लेकर एक नई सकारात्मक सोच को जन्म दिया। उनका व्यक्तित्व जितना सरल और सहज है, उतना ही दूरदर्शी और प्रभावशाली भी। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके व्यापक अनुभव और स्पष्ट विजन को देखकर यह महसूस होता है कि उनके नेतृत्व में लखनऊ विश्वविद्यालय आने वाले समय में नई उपलब्धियों की ओर तेजी से अग्रसर होगा।
Prof. Jai Prakash Saini ने Indian Institute of Technology Kanpur जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से शिक्षा प्राप्त की है और उनके पास 38 वर्षों से अधिक का अकादमिक एवं प्रशासनिक अनुभव है। इससे पहले वे Madan Mohan Malaviya University of Technology, Netaji Subhas University of Technology और Delhi Technological University जैसे प्रमुख संस्थानों में कुलपति और प्रशासनिक नेतृत्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनके 225 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और वे IETE के फेलो सदस्य भी हैं।
मुलाकात के दौरान प्रो. सैनी ने विश्वविद्यालय के विकास, आधुनिक शिक्षा प्रणाली और छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को बेहद स्पष्ट रूप से रखा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को प्रोफेशनल और स्किल आधारित शिक्षा से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। इसी दिशा में वे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को मजबूत करने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और नई शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उनका मानना है कि विश्वविद्यालय का प्रत्येक छात्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बने और उसे गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन एवं अवसर प्राप्त हों। छात्रों के करियर, रिसर्च और नवाचार को लेकर उनकी गंभीरता और संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
प्रो. जय प्रकाश सैनी का व्यक्तित्व सादगी, श्रेष्ठता और विजन का अद्भुत संगम है। उनसे हुई मुलाकात ने यह विश्वास और मजबूत किया कि उनके नेतृत्व में लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान स्थापित करेगा। विश्वविद्यालय परिवार को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं और निश्चित रूप से उनका कार्यकाल संस्थान के लिए एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत साबित होगा।
लेखक: देवेन्द्र प्रताप सिंह
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
