उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राज्य की सत्ता के केंद्र को आधुनिक स्वरूप देने की बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। लगभग 98 साल पुराने ऐतिहासिक विधानसभा भवन को अब नए अत्याधुनिक परिसर में स्थानांतरित किए जाने की योजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह नया विधान भवन गोमतीनगर स्थित सहारा सिटी की 245 एकड़ विशाल जमीन पर विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य की जरूरतों और डिजिटल गवर्नेंस को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जाएगा।
लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कंसल्टेंट और आर्किटेक्ट के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस परियोजना को लेकर एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के साथ एमओयू भी साइन किया गया है, ताकि आधुनिक शहरी नियोजन के अनुसार इसका खाका तैयार किया जा सके।
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यह जमीन पहले नगर निगम और LDA के स्वामित्व में थी, जिसे सहारा इंडिया समूह को लीज पर दिया गया था। लेकिन शर्तों के उल्लंघन के चलते 9 अक्टूबर को यह लीज रद्द कर दी गई, जिसके बाद यह भूमि फिर से सरकारी नियंत्रण में आ गई। इसके बाद शासन ने यहां नए विधानसभा परिसर के निर्माण का निर्णय लिया।
सरकार का मानना है कि मौजूदा विधानसभा भवन अब समय की जरूरतों के अनुसार पर्याप्त नहीं है। भविष्य में विधायकों की संख्या बढ़ने, डिजिटल प्रशासन के विस्तार और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए एक बड़े और आधुनिक परिसर की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी कारण कम से कम 200 एकड़ जमीन की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह स्थान उपयुक्त पाया गया।
प्रस्तावित नया परिसर केवल विधानसभा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें विधान परिषद, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के कार्यालय, विधायकों के चैंबर, सचिवालय, विशाल पार्किंग क्षेत्र और ग्रीन बेल्ट जैसी सुविधाएं भी एक ही स्थान पर विकसित की जाएंगी। इसे पूरी तरह ‘ई-विधानसभा’ के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां सभी कामकाज पेपरलेस और डिजिटल तकनीक पर आधारित होंगे।
इस परियोजना के लिए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वर्ष 2026-27 के बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक प्रावधान भी किया है। वहीं शासन स्तर पर 4 फरवरी को ही LDA को स्थान चयन और डिजाइन तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए गए थे।
LDA अधिकारियों के अनुसार, चयनित कंसल्टेंट को दो महीने के भीतर विस्तृत फिजिबिलिटी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें जमीन की स्थिति, निर्माण की संभावनाएं और तकनीकी चुनौतियों का विश्लेषण शामिल होगा। रिपोर्ट के बाद अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष इसका प्रस्तुतीकरण भी किया जाएगा।
