नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने मध्य प्रदेश की नीट अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या को देश की “भ्रष्ट और विफल शिक्षा व्यवस्था” का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंचा है और इसकी सबसे बड़ी कीमत देश के युवाओं को चुकानी पड़ रही है।
राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि आकांक्षा डॉक्टर बनकर समाज और देश की सेवा करना चाहती थी। उसके पिता एक किसान हैं, जिन्होंने बेटी की पढ़ाई के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर तीन लाख रुपये का कर्ज लिया। इसके अलावा उन्होंने नागपुर में रसोइए का काम कर बेटी के सपनों को पूरा करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि परिवार ने अपनी ओर से हर संभव प्रयास किया, लेकिन नीट प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता के माहौल ने छात्रा को मानसिक रूप से तोड़ दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार हो रही गड़बड़ियों के बावजूद सरकार ठोस सुधार करने में विफल रही है।
कांग्रेस नेता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक केवल जांच समितियां गठित की गई हैं और घोषणाएं की गई हैं, लेकिन न तो व्यवस्था में कोई बड़ा सुधार दिखाई दिया और न ही दोषियों को सख्त सजा मिली।
गौरतलब है कि Mauganj की रहने वाली 18 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी Nagpur में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। 20 मई को उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। कुछ दिनों बाद परिवार को उनका हस्तलिखित पत्र मिला, जिसमें उन्होंने अपने माता-पिता से माफी मांगी थी।
पत्र में आकांक्षा ने लिखा था कि उनके माता-पिता को उनसे डॉक्टर बनने की उम्मीद थी, लेकिन अब उनमें दोबारा नीट परीक्षा देने का साहस नहीं बचा था। उन्होंने यह भी लिखा कि पहले प्रयास में अच्छे अंक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन परिस्थितियों ने उनका आत्मविश्वास तोड़ दिया और भविष्य को लेकर भरोसा खत्म हो गया। पत्र के अंत में उन्होंने अपने माता-पिता से क्षमा मांगते हुए खुद को उनकी उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
