लखनऊ के विभूतिखण्ड क्षेत्र स्थित आरएमएल अस्पताल की ओल्ड ओपीडी में महिला के साथ सुरक्षाकर्मियों द्वारा मारपीट किए जाने की सोशल मीडिया और कुछ न्यूज प्लेटफॉर्म पर प्रसारित खबरों को पुलिस ने भ्रामक और निराधार बताया है। मामले की जांच के बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों द्वारा महिला के साथ किसी प्रकार की मारपीट की पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस के अनुसार, 5 जून 2026 को थाना विभूतिखण्ड पुलिस को आरएमएल अस्पताल की ओल्ड ओपीडी में दो महिलाओं के बीच विवाद और मारपीट की सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई।
जांच में सामने आया कि ओपीडी पर्चा काउंटर पर लाइन में लगने को लेकर बाराबंकी निवासी रीना सिंह और एक अन्य महिला के बीच विवाद हो गया था। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और महिला सुरक्षा कर्मियों ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन विवाद बढ़ता गया।
पुलिस के मुताबिक रीना सिंह अस्पताल परिसर से बाहर सड़क पर चली गईं और स्वयं को अस्वस्थ प्रदर्शित करने लगीं, जिससे अस्पताल परिसर और आसपास शांति व्यवस्था प्रभावित होने लगी। इसके बाद पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच करते हुए अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद लोगों से प्राप्त जानकारी के आधार पर पुलिस ने पाया कि रीना सिंह और दूसरी महिला के बीच कहासुनी और मारपीट हुई थी। हालांकि जांच में अस्पताल के किसी भी सुरक्षा कर्मी द्वारा महिला के साथ मारपीट किए जाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर चल रही सुरक्षाकर्मियों द्वारा महिला की पिटाई की खबर पूरी तरह असत्य और निराधार है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों में ऐसे किसी आरोप की पुष्टि नहीं होती है।शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से रीना सिंह के विरुद्ध बीएनएसएस की धारा 170/120/135 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की गई है। साथ ही उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी घटना के संबंध में अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें तथा आधिकारिक तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही जानकारी साझा करें।
