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लखनऊ: अंडरग्राउंड नाले की सफाई के दौरान कर्मचारी की मौत, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल

लखनऊ के चिनहट क्षेत्र में अंडरग्राउंड नाले की सफाई के दौरान सफाई कर्मचारी लालाराम की मौत के बाद नगर निगम और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सफाई कर्मियों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि नालों की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता और अधिकारियों की निगरानी केवल कागजों तक सीमित रहती है।

सफाई कर्मचारियों का कहना है कि नाले और सीवर की सफाई के दौरान नगर निगम की ओर से कोई प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं होती। पूरा काम ठेकेदारों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। आरोप है कि लालाराम को भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के अंडरग्राउंड चैंबर में उतारा गया था। घटना के बाद भी शहर के कई हिस्सों में बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के सफाई कार्य जारी है।

सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी का आरोप

मानक नियमों के अनुसार, किसी भी मैनहोल या सीवर की सफाई से पहले कम से कम तीन मैनहोल खोले जाते हैं ताकि ताजी हवा का प्रवाह सुनिश्चित हो सके। इसके बाद सक्शन पंप की मदद से गैस निकासी और ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। विशेष उपकरणों से ऑक्सीजन स्तर की जांच के बाद ही कर्मचारियों को अंदर भेजा जाता है।

इसके अलावा, यातायात प्रभावित न हो और जोखिम कम रहे, इसलिए ऐसे कार्य रात के समय करने की सलाह दी जाती है। लेकिन चिनहट तिराहे पर यह काम दिन के व्यस्त समय में किया गया। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षा संबंधी लगभग सभी मानकों का उल्लंघन हुआ।

ठेकेदार पर जिम्मेदारी डाल रहा नगर निगम

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि संबंधित ठेका कंपनी शोभा इंटरप्राइजेज के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, अनुबंध की शर्तों में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ठेकेदार की थी और नियमों के उल्लंघन पर मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।

हालांकि, स्थानीय पार्षद अरुण राय का कहना है कि संबंधित नाले की सफाई हर साल नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग की निगरानी में होती है, इसलिए केवल ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है।

चार जून को हुआ था निरीक्षण

घटना से दो दिन पहले, 4 जून को प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने मेयर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार के साथ चिनहट बाजार का निरीक्षण किया था। इस दौरान साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर निर्देश भी दिए गए थे। घटना के बाद मेयर और नगर आयुक्त अस्पताल पहुंचे और कार्रवाई का आश्वासन दिया।

परिवार ने उठाए सवाल

मृतक लालाराम की मौसी ने आरोप लगाया कि अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने परिवार से मुलाकात नहीं की है। उन्होंने कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो संबंधित ठेकेदार का ठेका रद्द किया जाए। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि शव को लावारिस बताने की बात कही गई, जबकि लालाराम का परिवार उसके साथ मौजूद था।

प्रत्यक्षदर्शी सहकर्मी ने बताई घटना

लालाराम के साथ काम कर रहे कर्मचारी ललित के अनुसार, चैंबर में उतरते ही जहरीली गैस के कारण लालाराम बेहोश होकर गिर गए। बाद में उनके कंधे पर रस्सी बांधकर उन्हें बाहर निकाला गया। ललित का दावा है कि मौके पर कोई सुरक्षा बेल्ट, गैस डिटेक्टर या अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं।

यह घटना एक बार फिर सीवर और नाला सफाई कार्यों में कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन और जवाबदेही तय किए बिना ऐसी दुर्घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा।

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