रिपोर्ट : – ममता भारद्वाज
आगरा के शमसाबाद कस्बे में रविवार सुबह जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्व में निकाली जा रही 81 दिवसीय गविष्टि (गौ-रक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा पहुंची। यात्रा का उद्देश्य देशभर में गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने की मांग को जन-जन तक पहुंचाना है।
राजाखेड़ा मार्ग स्थित परशुराम भवन में यात्रा का स्थानीय श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने स्वागत किया। इस अवसर पर पंडित अशोक दीक्षित और एडवोकेट रूपाली दीक्षित ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शंकराचार्य का पूजन-अर्चन कर अभिनंदन किया। कार्यक्रम के दौरान परिसर गौ-माता के जयकारों और भजन-कीर्तन से गूंजता रहा।
सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि सनातन धर्म में गौ-माता का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व है। उन्होंने कहा कि गौ-रक्षा केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि प्रत्येक सनातनी का नैतिक और धार्मिक दायित्व है। उन्होंने दोहराया कि जब तक देश में गौ-हत्या पर पूर्ण रूप से रोक नहीं लगती, तब तक यह धर्मयुद्ध जारी रहेगा।
अपने संबोधन में उन्होंने वर्तमान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि गौ-रक्षा के मुद्दे पर समाज को जागरूक होकर एकजुट होने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भविष्य में ऐसे जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों का समर्थन करें जो गौ-रक्षा और गौ-कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हों।

शंकराचार्य ने कहा, “जब तक गौ-हत्या पर पूर्ण विराम नहीं लगता, यह धर्मयुद्ध अनवरत जारी रहेगा। सनातन समाज को गौ-रक्षा के लिए संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।”यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। गौ-रक्षा यात्रा आगे अन्य जनपदों में भी विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से अपने अभियान को जारी रखेगी।
