लखनऊ, 8 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख टेक्सटाइल एवं परिधान विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना अब तेज गति से आगे बढ़ रही है।
प्रदेश के पांच प्रमुख जिलों—वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर—में कुल 326 एकड़ से अधिक भूमि पर आधुनिक टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क विकसित किए जा रहे हैं। ये सभी पार्क पीपीपी (Public Private Partnership) मॉडल पर विकसित होंगे, जिससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं में भूमि हस्तांतरण, प्री-फिजिबिलिटी अध्ययन और आधारभूत ढांचे के निर्माण कार्यों में तेजी देखी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि इन पार्कों के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो और स्थानीय युवाओं को टेक्सटाइल उद्योग से जोड़ा जा सके।
औद्योगिक विकास के साथ रोजगार सृजन पर फोकस
इन टेक्सटाइल पार्कों के विकसित होने से प्रदेश में न केवल औद्योगिक निवेश बढ़ेगा बल्कि हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बनेंगे। सरकार का दावा है कि यह योजना यूपी को देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
पांच नए एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं महाविद्यालयों को मंजूरी
ये संस्थान देवीपाटन, मीरजापुर, मेरठ, आगरा और बस्ती मंडलों में स्थापित किए जाएंगे। चार मंडलों में भूमि पहले से आयुष विभाग के नाम दर्ज है, जबकि बस्ती में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
इन संस्थानों के शुरू होने से आयुष चिकित्सा शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणाली को आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे से जोड़ना है
कुपोषण के खिलाफ यूपी की बड़ी उपलब्धि, 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रही पोषण सुविधा
प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ चल रही लड़ाई में उत्तर प्रदेश एक मॉडल राज्य के रूप में उभरकर सामने आया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की टेक होम राशन योजना के तहत हर महीने लगभग 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पौष्टिक आहार पहुंचाया जा रहा है।
इस योजना में छह माह से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे शामिल हैं। यह व्यवस्था पोषण 2.0 गाइडलाइन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत संचालित की जा रही है।
पोषण संकेतकों में सुधार, नाटेपन में आई बड़ी गिरावट
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 की तुलना में 2019-21 के बीच प्रदेश में बच्चों में स्टंटिंग (नाटेपन) की दर 39.7 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके साथ ही अल्पवजन और दुबलापन के मामलों में भी सुधार दर्ज किया गया है।विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट बताती है कि सरकार की पोषण नीतियां जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही हैं।
