लखनऊ। उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने वाला मिशन शक्ति अभियान आज महिला सशक्तीकरण की एक सफल मिसाल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित इस अभियान ने न केवल महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आर्थिक सशक्तीकरण के नए अवसर भी उपलब्ध कराए हैं।
एक समय महिला सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहने वाला उत्तर प्रदेश अब महिलाओं के सशक्तीकरण के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। मिशन शक्ति अभियान के माध्यम से सरकार ने सुरक्षा, शिक्षा, जागरूकता और आत्मनिर्भरता को एकीकृत करते हुए सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी है।
आत्मरक्षा प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास
मिशन शक्ति के तहत प्रदेशभर के विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में व्यापक स्तर पर आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए। सरकार के अनुसार 10 लाख से अधिक बालिकाओं को जूडो-कराटे और सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण दिया गया है। इस पहल ने छात्राओं को न केवल शारीरिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी विकसित की।
महिला हेल्पलाइन, साइबर सुरक्षा, कानूनी अधिकारों और सुरक्षा संबंधी जागरूकता अभियानों ने भी महिलाओं और बालिकाओं को अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग बनाया है।
नेतृत्व विकास की नई पहल
बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘एक दिन की अधिकारी’ कार्यक्रम को भी व्यापक सफलता मिली है। इस कार्यक्रम के तहत 89 हजार से अधिक छात्राओं को प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव कराया गया।
ब्लॉक, तहसील, जिला और विद्यालय स्तर पर अधिकारियों की भूमिका निभाते हुए छात्राओं ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को करीब से समझा। इससे उनमें नेतृत्व कौशल विकसित हुआ और बड़े लक्ष्य हासिल करने का आत्मविश्वास बढ़ा।
जागरूकता अभियानों से आया सामाजिक बदलाव
मिशन शक्ति के अंतर्गत आयोजित मीना मंच, मीना दिवस, जनसंवाद, जागरूकता रैलियों और नुक्कड़ नाटकों ने महिला सशक्तीकरण के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इन कार्यक्रमों में लाखों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी रही। इसके माध्यम से लैंगिक समानता, बाल विवाह निषेध, महिला अधिकार, साइबर सुरक्षा और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता का माहौल तैयार हुआ।
आर्थिक और डिजिटल सशक्तीकरण पर फोकस
मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं और बालिकाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। हजारों छात्राओं को डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों से जोड़कर बैंकिंग, बचत और आर्थिक प्रबंधन की जानकारी दी गई।
इसके अलावा विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के प्रयास किए गए, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
बदली सामाजिक सोच, बढ़ा बेटियों का सम्मान
मिशन शक्ति का सबसे बड़ा प्रभाव समाज में बेटियों के प्रति बदलती सोच के रूप में दिखाई दे रहा है। प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों को लेकर सकारात्मक वातावरण विकसित हुआ है। परिवारों और समुदायों में बालिकाओं के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया है और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
महिला सुरक्षा को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और मिशन शक्ति जैसे अभियानों ने महिलाओं में विश्वास का माहौल तैयार किया है। आज उत्तर प्रदेश की बेटियां शिक्षा, खेल, विज्ञान, प्रशासन, तकनीक और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं।
मिशन शक्ति केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाला जनआंदोलन बन चुका है, जिसने उत्तर प्रदेश को महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है।
