लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनहीनता के आरोपों में बीए-एलएलबी द्वितीय वर्ष के छात्र सत्यम यादव को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी आदेश में छात्र को भविष्य में लखनऊ विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध किसी भी कॉलेज में प्रवेश न देने की बात भी कही गई है।
दूसरी ओर, फीस वृद्धि और छात्र नेताओं पर कार्रवाई के विरोध में विश्वविद्यालय परिसर में सरस्वती प्रतिमा के पास छात्रों का धरना लगातार दसवें दिन भी जारी रहा। धरने को पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन मिल रहा है।
इसी क्रम में कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया भी छात्रों के समर्थन में धरना स्थल पहुंचे। वहीं पूर्व सांसद धनंजय सिंह का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने फीस वृद्धि के विरोध में छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कुलसचिव से की मुलाकात
गुरुवार को कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा से मुलाकात कर छात्र नेताओं पर की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और फीस वृद्धि के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद स्थापित कर विवाद का समाधान निकाला जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक श्याम किशोर शुक्ला, सुरेंद्र यादव, कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी, कुलदीप दिवाकर, संजय सिंह, अंकित तिवारी, अमित राय, श्रवण गुप्ता, अब्दुल्ला आजम, आर्यन मिश्रा और शमी खान शामिल रहे।
जांच में आरोप सही पाए गए
कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, डीन स्टूडेंट वेलफेयर और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की जांच रिपोर्ट के आधार पर सत्यम यादव के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट में छात्र पर विश्वविद्यालय की मर्यादा के विपरीत आचरण, अनधिकृत रूप से छात्रावास और परिसर में प्रवेश करने तथा प्रशासनिक कार्यों में बाधा पहुंचाने के आरोप सही पाए गए।
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, 21 मई 2026 को छात्र ने न्यू कैंपस स्थित होमी जहांगीर भाभा छात्रावास में अनधिकृत प्रवेश किया था। इसी दिन बार काउंसिल ऑफ इंडिया की निरीक्षण टीम के दौरे के दौरान निरीक्षण कार्य में व्यवधान डालने का आरोप भी लगाया गया है।
सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचना फैलाने का आरोप
आदेश में यह भी कहा गया है कि छात्र ने सोशल मीडिया के माध्यम से विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली भ्रामक जानकारियां प्रसारित कीं, जिससे परिसर की शांति और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुए।
दस्तावेजों के अनुसार, छात्र पहले भी विवादों में रह चुका है। फरवरी 2025 में कथित तौर पर उसने न्याय न मिलने की स्थिति में पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन करने संबंधी संदेश प्रसारित किया था। इसके अलावा छात्रावास में जबरन प्रवेश, अधिकारियों से अभद्रता और धमकी देने जैसे आरोप भी जांच रिपोर्ट में दर्ज हैं।
