मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का पंचायती राज विभाग बीते पांच वर्षों में ग्रामीण विकास का नया मॉडल बनकर उभरा है। डिजिटल सुशासन, स्वच्छता, आधारभूत ढांचे और पंचायतों की आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए कार्यों ने गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने का काम किया है।
प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में ग्राम सचिवालय स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं 24,311 पंचायत भवनों का निर्माण कर ग्रामीण प्रशासन को मजबूत आधार प्रदान किया गया है।
पंचायत सचिवालयों में कंप्यूटर, इंटरनेट, फर्नीचर और पेयजल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही विभिन्न सरकारी सेवाएं मिलने लगी हैं।
डिजिटल इंडिया के विजन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में 54,958 कॉमन सर्विस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 49.38 लाख से अधिक सेवाएं ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि पंचायतों की आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत उत्तर प्रदेश ने सामुदायिक शौचालय निर्माण और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हजारों गांवों में ग्रे-वाटर मैनेजमेंट और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल के जरिए कचरे को आय के स्रोत में बदलने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है।
पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हुए विभाग ने लाखों जनप्रतिनिधियों और कर्मियों को विभिन्न योजनाओं के तहत प्रशिक्षित किया है। डिजिटल लाइब्रेरी, पंचायत गेटवे पोर्टल और परिवार रजिस्टर के डिजिटलीकरण जैसे नवाचार ग्रामीण प्रशासन को आधुनिक स्वरूप दे रहे हैं।
आने वाले वर्षों में ‘मेरा तालाब-मेरी जिम्मेदारी’, फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट, पंचायत उत्सव भवन, डिजिटल लाइब्रेरी विस्तार और मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
योगी सरकार का यह पंचायत विकास मॉडल ग्रामीण उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर, स्वच्छ और डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
