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भीषण गर्मी से राहत की कामना, गंगा की गोद में खड़े होकर शहनाई वादक ने बजाया राग मेघ

वाराणसी में पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से राहत की कामना के लिए मंगलवार को एक अनोखी परंपरा निभाई गई। काशी के प्रसिद्ध शहनाई वादक Pandit Mahendra Prasanna ने मां गंगा की गोद में खड़े होकर राग मेघ का वादन किया और इंद्रदेव से अच्छी बारिश की प्रार्थना की।

जानकारी के अनुसार, काशी में दशकों पुरानी मान्यता के तहत भीषण गर्मी के दौरान राग मेघ का वादन किया जाता है। मान्यता है कि इस राग के प्रभाव से वर्षा की संभावना बढ़ती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वाराणसी के Rewa Ghat पर विशेष पूजन-अर्चन के बाद शहनाई वादन किया गया।

पंडित महेंद्र प्रसन्ना ने बताया कि मां गंगा, बाबा विश्वनाथ, भगवान भास्कर और इंद्रदेव की पूजा-अर्चना कर लोगों को गर्मी से राहत मिलने की कामना की गई। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि इंद्रदेव राग मेघ से प्रसन्न होते हैं और वर्षा अवश्य करेंगे। उनके अनुसार अगले 36 घंटे में अच्छी बारिश होने की संभावना है।

शहनाई वादन के दौरान “रिमझिम बरसे बदरिया”, “काले बदरा”, “बरसो रे मेघ” जैसे मेघ रागों की प्रस्तुति दी गई। पंडित प्रसन्ना काशी के प्रतिष्ठित शहनाई वादकों में गिने जाते हैं और Kashi Vishwanath Temple में भी नियमित रूप से शहनाई वादन करते हैं।

गौरतलब है कि पूर्वांचल के कई जिलों में इन दिनों भीषण गर्मी और उमस का दौर जारी है। बीच-बीच में बादल छाने से धूप की तीव्रता कुछ कम जरूर हुई है, लेकिन मौसम की उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है। ऐसे में बारिश की उम्मीद के साथ निभाई गई यह परंपरा लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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