प्रदेश सरकार राज्य में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को मंजूरी देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में सोमवार सुबह 10 बजे होने वाली कैबिनेट बैठक में इस नीति सहित करीब दो दर्जन प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।
यह नई स्टार्टअप नीति अगले पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी और इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप इकोसिस्टम वाले राज्यों में शामिल करना है। इसके तहत युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर जोर दिया गया है।
नीति में विशेष रूप से हाईटेक और डीप-टेक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक वित्तीय और संस्थागत सहायता प्रदान की जाएगी। इसके तहत स्टार्टअप को दो वर्षों तक 20 हजार रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण भत्ता, प्रोटोटाइप विकास के लिए 50 लाख रुपये तक अनुदान और मिनिमम वायबल प्रोडक्ट (MVP) के लिए 15 लाख रुपये तक सीड फंडिंग दिए जाने का प्रावधान है। विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक बढ़ाई जा सकती है।
सरकार डीप-टेक हब, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इनक्यूबेटर और एक्सेलेरेटर नेटवर्क के विस्तार की भी योजना बना रही है। इसके साथ ही शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ साझेदारी बढ़ाकर नवाचार आधारित उद्यमिता को मजबूत किया जाएगा। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ई-सेल, हैकाथॉन, स्टार्टअप वीक, ग्रैंड चैलेंज और नवाचार मेलों के माध्यम से स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में शहरी विकास से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी, जिनमें गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगमों द्वारा म्यूनिसिपल बॉन्ड के जरिए धन जुटाने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा कुछ नगरों के नाम परिवर्तन, निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और विभिन्न विभागों के प्रशासनिक प्रस्ताव भी एजेंडे में हैं।
साथ ही लगभग 1.60 लाख होमगार्ड स्वयंसेवकों और उनके आश्रितों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने के प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है।
कुल मिलाकर यह कैबिनेट बैठक स्टार्टअप, शहरी विकास, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम निर्णयों की दिशा तय कर सकती है।
