लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 बच्चों की मौत के बाद विवादों में आई कमर्शियल बिल्डिंग के भविष्य पर बुधवार को बड़ा फैसला होने जा रहा है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की विहित प्राधिकारी अदालत यह तय करेगी कि भवन को अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्त किया जाएगा या भवन स्वामियों को किसी प्रकार की राहत मिलेगी।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान भवन स्वामियों की ओर से अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुए और जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। इसके बाद विहित प्राधिकारी एवं संयुक्त सचिव अतुल कुमार ने एक दिन की मोहलत देते हुए अंतिम सुनवाई बुधवार के लिए निर्धारित की।
23 जून को जारी हुआ था नोटिस
एलडीए ने 23 जून को भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी कर 7 जुलाई तक जवाब देने के निर्देश दिए थे। निर्धारित समय पर विस्तृत पक्ष और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
आवासीय नक्शे पर बनाया गया व्यावसायिक भवन
एलडीए की जांच में सामने आया कि सेक्टर-डी, अलीगंज स्थित 185 वर्गमीटर के भूखंड का नक्शा वर्ष 2014 में आवासीय भवन के रूप में स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि स्वीकृत मानचित्र का उल्लंघन करते हुए सेटबैक क्षेत्र को कवर कर बेसमेंट से तीसरी मंजिल तक व्यावसायिक निर्माण कर लिया गया। साथ ही पिछले लगभग 10 वर्षों से पूरे भवन का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था, जबकि मास्टर प्लान में यह भूखंड आवासीय श्रेणी में दर्ज है।
15 बच्चों की मौत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
22 जून को इसी इमारत में लगी भीषण आग में 15 बच्चों की दम घुटने से मौत हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे के बाद भवन की वैधता, निर्माण मानकों और फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे। जांच के बाद एलडीए ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया था।
अब बुधवार को होने वाला फैसला इस बहुचर्चित मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगा।
