लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले चर्चा में है। 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली महत्वपूर्ण सुनवाई से पहले आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों ने प्रदेश सरकार से उनके पक्ष में याची लाभ का प्रस्ताव रखने की मांग की है। अभ्यर्थियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य सचिव एसपी गोयल को ईमेल भेजकर हस्तक्षेप की अपील की है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों के पक्ष में याची लाभ का प्रस्ताव रखती है तो वर्षों से चला आ रहा यह विवाद स्थायी रूप से समाप्त हो सकता है। उनका दावा है कि सरकार की ओर से सकारात्मक पहल होने पर प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय मिल सकेगा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से जारी गतिरोध का समाधान निकाला जा सकता है।
सरकार से सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव रखने की मांग
आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों ने अपने पत्र में प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि वह आगामी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष में याची लाभ का प्रस्ताव प्रस्तुत करे। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस मामले में लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इसके परिणाम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से याची लाभ के प्रस्ताव से मामले का स्थायी समाधान संभव हो सकता है।
अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और मुख्य सचिव को भेजे ईमेल में कहा है कि सरकार इस मामले में प्रभावी पैरवी करते हुए आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों के हित में ठोस कदम उठाए। उनका मानना है कि सरकार की पहल से न केवल प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है, बल्कि 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा विवाद भी समाप्त होने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
28 जुलाई की सुनवाई पर टिकी नजर
उधर, हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मामले की पैरवी कर रहे पिछड़ा-दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप ने बताया कि 28 जुलाई को होने वाली सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट ने वादी और प्रतिवादी दोनों पक्षों को दो-दो पृष्ठ का लिखित पक्ष यानी रिटन सबमिशन दाखिल करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों की ओर से याची लाभ की मांग के समर्थन में अपना लिखित पक्ष सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया गया है। अब मामले में अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
लंबे समय से जारी है विवाद
69,000 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला उत्तर प्रदेश में लंबे समय से कानूनी विवाद का विषय बना हुआ है। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण को लेकर उठे विवाद के बाद अभ्यर्थियों के विभिन्न पक्ष अदालतों में पहुंचे। इस मामले में अलग-अलग पक्षों की ओर से न्यायालय में अपनी-अपनी दलीलें रखी जाती रही हैं।
अब 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को लेकर अभ्यर्थियों में उम्मीद और चिंता दोनों बनी हुई हैं। आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार यदि उनके पक्ष में याची लाभ का प्रस्ताव रखती है तो यह विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। फिलहाल, सभी पक्षों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और उसके संभावित रुख पर टिकी हैं।
