लखनऊ के इको गार्डन में बिजली विभाग के संविदा कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लखनऊ पहुंचने के बावजूद उनकी ऊर्जा मंत्री से मुलाकात नहीं कराई गई और अधिकारियों ने उन्हें गुमराह किया।
इको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरना
संविदा कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें शक्ति भवन पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लेकर इको गार्डन लाया गया था। इसके बाद से वे वहीं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। फिलहाल प्रदेश के 75 जिलों से प्रतीकात्मक रूप से 1-2 कर्मचारी शामिल हुए हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो सभी जिलों से बड़ी संख्या में कर्मचारी लखनऊ पहुंचेंगे और जरूरत पड़ने पर बिजली शटडाउन जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।

18 हजार रुपये वेतन की मांग
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन संविदा कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष सुरेंद्र पांडे ने कहा कि संविदा कर्मचारियों को मात्र 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है, जबकि वे 440 वोल्ट और 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइनों पर जान जोखिम में डालकर काम करते हैं। उन्होंने सभी संविदा कर्मचारियों के लिए कम से कम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन की मांग की। उनका कहना है कि विभाग में कार्यरत पूर्व सैनिकों को 28 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है।
30 दिनों में 30 कर्मचारियों की मौत का दावा
सुरेंद्र पांडे ने दावा किया कि पिछले 30 दिनों में प्रदेशभर में 56 हादसे हुए, जिनमें 30 संविदा कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 26 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा उपकरणों के लिए बजट जारी होने के बावजूद कर्मचारियों को केवल हेलमेट देकर औपचारिकता पूरी की जा रही है।
’30 हजार कर्मचारियों की छंटनी हुई’
संघ के अध्यक्ष नकुल चौधरी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से अब तक करीब 30 हजार संविदा कर्मचारियों की छंटनी की जा चुकी है। इससे मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है और दुर्घटनाओं की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। उन्होंने छंटनी किए गए कर्मचारियों की बहाली, उचित मुआवजा और लंबित मांगों के समाधान की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द वार्ता कर समाधान नहीं निकाला गया तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा।
