मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए लखनऊ नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहर के जलभराव वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, जबकि एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग अभियान तेज कर दिया गया है। साथ ही अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
लखनऊ की महापौर सुषमा खरकवाल ने बताया कि डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें उन क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं, जहां जलभराव की समस्या रहती है या पिछले वर्षों में डेंगू, मलेरिया और डायरिया के अधिक मामले सामने आए थे।
नगर निगम के अनुसार जोन-3 और जोन-6 के संवेदनशील इलाकों—फैजुल्लागंज, जानकीपुरम, पारा, दुबग्गा और पीजीआई—में नियमित रूप से एंटी-लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराई जा रही है। लोगों से अपील की गई है कि घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। यदि पानी हटाना संभव न हो तो उसमें दवा का छिड़काव करें, ताकि मच्छरों का प्रजनन रोका जा सके।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एन.बी. सिंह ने बताया कि जिले के 30 अस्पतालों में डेंगू और मलेरिया के मरीजों के लिए 10-10 बेड आरक्षित किए गए हैं। सभी सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पतालों में जांच किट उपलब्ध करा दी गई हैं और डॉक्टरों की विशेष टीमें भी तैनात की गई हैं।
उन्होंने बताया कि 29 जुलाई से 29 अगस्त तक पूरे जिले में डायरिया जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। एएनएम और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को डायरिया से बचाव, प्राथमिक उपचार और समय पर अस्पताल पहुंचने की जानकारी देंगे।
डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि डेंगू की वैक्सीन को भारत में मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अभी इसे लॉन्च नहीं किया गया है। फिलहाल यह बाजार और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है। केंद्र सरकार की गाइडलाइन जारी होने के बाद ही इसका उपयोग शुरू होगा।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, उल्टी, दस्त या अन्य लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच कराएं। साथ ही साफ-सफाई रखें, पानी जमा न होने दें और बारिश के मौसम में स्वच्छ पेयजल व तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।
