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सावन संकष्टी चतुर्थी, शिव-गणेश की पूजा से दूर होंगी बाधाएं, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

सावन मास की संकष्टी चतुर्थी का व्रत इस वर्ष 2 अगस्त को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश के साथ भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। सावन मास होने के कारण इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 1 अगस्त रात 11:07 बजे शुरू होकर 2 अगस्त रात 11:15 बजे समाप्त होगी। चूंकि संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद पूरा किया जाता है, इसलिए यह व्रत 2 अगस्त को ही मनाया जाएगा। दिल्ली-एनसीआर में चंद्रोदय का समय रात 9:24 बजे बताया गया है।

ऐसे करें शिव-गणेश की पूजा

सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन निराहार रहें। सबसे पहले भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक कर बेलपत्र, चंदन और फूल अर्पित करें। इसके बाद माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें।

फिर भगवान गणेश का पंचामृत स्नान कराकर उन्हें दूर्वा, फूल और मोदक का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें और आरती करें। शाम को पुनः गणेश जी की पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दें और फिर प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

गजानन स्वरूप का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश के गजानन स्वरूप की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। मुद्गल पुराण के अनुसार, लोभासुर नामक दैत्य के अत्याचारों से परेशान देवताओं की प्रार्थना पर भगवान गणेश गजानन रूप में प्रकट हुए और उसका वध कर धर्म की रक्षा की थी। इसी कारण इस दिन गजानन स्वरूप की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

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