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घर में छोटी दुकान चलाने वालों को राहत का इंतजार, बिजली कंपनियों ने नहीं भेजा प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश में अपने घर के आंशिक हिस्से में छोटी दुकान चलाने वाले करीब 35 लाख उपभोक्ताओं को अभी भी राहत का इंतजार है। विद्युत नियामक आयोग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बिजली वितरण कंपनियों ने अब तक घरेलू श्रेणी की बिजली से छोटी दुकानें संचालित करने संबंधी कोई प्रस्ताव आयोग को नहीं भेजा है। इससे लाखों उपभोक्ताओं में निराशा है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश सरकार और पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि नियामक आयोग के निर्देशों का तत्काल पालन कराया जाए, ताकि इस मुद्दे पर जल्द निर्णय लिया जा सके। परिषद का कहना है कि घर के सीमित हिस्से में छोटी दुकान चलाने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली के उपयोग की अनुमति मिलनी चाहिए।

परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि नवंबर 2025 और जुलाई 2026 के टैरिफ आदेश में विद्युत नियामक आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों को तीन माह के भीतर प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अब तक कोई प्रस्ताव आयोग के समक्ष नहीं भेजा गया है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 35 लाख परिवार ऐसे हैं, जो अपने घर के एक हिस्से में किराना, सिलाई, चाय, पान या अन्य छोटी दुकानें चलाकर आजीविका कमाते हैं। परिषद लंबे समय से इन उपभोक्ताओं को घरेलू बिजली श्रेणी में ही दुकान संचालित करने की अनुमति देने की मांग कर रही है।

परिषद का आरोप है कि प्रस्ताव लंबित होने के कारण विभागीय और विजिलेंस की टीमें ऐसे उपभोक्ताओं पर कार्रवाई कर रही हैं, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिषद ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर इस मामले में समाधान निकालने की मांग की है।

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