रिपोर्ट रामजी व्यास
जालौन। जिले के कुठौंद ब्लॉक क्षेत्र में पिछले दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार बारिश के कारण खेतों में भारी जलभराव हो गया है, जिससे तिली, बाजरा, कुमड़ा (कद्दू) समेत कई खरीफ फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो तैयार फसलें पूरी तरह नष्ट हो सकती हैं।
बारिश के चलते खेत तालाब में तब्दील हो गए हैं। कई स्थानों पर फसलें पूरी तरह पानी में डूबी हुई हैं, जिससे उनके सड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसानों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।
किसानों ने बताया कि इस वर्ष यह दूसरी बड़ी मार है। इससे पहले गेहूं की फसल ओलावृष्टि की चपेट में आ गई थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा था। अभी वे उस नुकसान से उबर भी नहीं पाए थे कि अब लगातार बारिश ने खरीफ की फसलों को भी संकट में डाल दिया है।

किसानों का यह भी आरोप है कि ओलावृष्टि से प्रभावित कई गांवों, विशेषकर कुरौली के किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। ऐसे में लगातार प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए, फसलों के नुकसान का आकलन कर शीघ्र मुआवजा दिया जाए और जलभराव की समस्या दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

