एमबीबीएस और बीडीएस की राज्य कोटे की काउंसलिंग शुरू होने के साथ ही आयुष चिकित्सा पद्धति की सीटों पर दाखिले के लिए भी तैयारियां तेज हो गई हैं। हालांकि, प्रदेश के आयुर्वेदिक और यूनानी मेडिकल कॉलेजों को अभी भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) से मान्यता मिलने का इंतजार है।
आयुष विभाग की ओर से एनसीआईएसएम की ओर से उठाई गई आपत्तियों का समाधान करते हुए शपथ पत्र भेज दिया गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही आयुर्वेदिक और यूनानी कॉलेजों को मान्यता मिल सकती है। हर वर्ष एनसीआईएसएम की टीम आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी कॉलेजों का निरीक्षण करती है। इस दौरान शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाओं और प्रयोगशालाओं समेत अन्य मानकों की जांच की जाती है।
इस वर्ष समय पर जवाब नहीं मिलने के कारण प्रदेश के आयुर्वेद और यूनानी कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया लंबित रही। वहीं, राज्य के सभी होम्योपैथी कॉलेजों को मान्यता मिल चुकी है।
आरटीई के तहत दाखिले में लापरवाही पर 18 स्कूलों को नोटिस
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के दाखिले को लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। जिलाधिकारी विशाख जी के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में दाखिला नहीं लेने वाले 18 निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है।
इन स्कूलों को दाखिले की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। निर्धारित समय के भीतर बच्चों को प्रवेश नहीं देने पर स्कूलों की मान्यता रद करने का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा जाएगा।
बेसिक शिक्षा अधिकारी के मुताबिक जिले में करीब 97 निजी स्कूल ऐसे चिह्नित किए गए थे, जो आरटीई के तहत आवंटित बच्चों के दाखिले में सहयोग नहीं कर रहे थे। इनमें शहर के कई बड़े और प्रतिष्ठित विद्यालय भी शामिल हैं। प्रशासन की सख्ती और लगातार निगरानी के बाद अब तक इन स्कूलों में 1400 से अधिक बच्चों के दाखिले कराए जा चुके हैं।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आरटीई के तहत पात्र बच्चों को प्रवेश देना निजी स्कूलों की कानूनी जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग संयुक्त रूप से दाखिला प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं।
वहीं, अभिभावक संघ के अध्यक्ष पीके श्रीवास्तव का आरोप है कि जब तक स्कूलों की मान्यता रद करने जैसी सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मनमानी पर पूरी तरह रोक लगना मुश्किल है। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी स्कूल की मान्यता रद नहीं की गई है।
