अयोध्या :सरयू की कलकल करती लहरों के बीच राम धुन और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से रामनगरी गूंज रही है। इस बार सावन अयोध्या के लिए खास है। भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद यह पहला ऐसा सावन है, जब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु रामलला के दर्शन के साथ अयोध्या के प्रमुख शिव मंदिरों में भी पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं।
राम की नगरी में शिव की आराधना त्रेतायुग की उस परंपरा की याद दिलाती है, जिसमें भगवान राम और भगवान शिव एक-दूसरे की आराधना करते थे। अयोध्या के प्राचीन शिव मंदिरों में आज भी राम और शिव की भक्ति का यह संगम देखने को मिलता है।
कुबेर टीला पर कुबेश्वरनाथ का दरबार
राम जन्मभूमि परिसर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में करीब 100 फीट ऊंचा कुबेर टीला स्थित है। मान्यता है कि भगवान कुबेर ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी। इसी टीले पर कुबेश्वरनाथ महादेव मंदिर स्थापित है।
कहा जाता है कि यह स्थान भगवान राम के जन्म से भी पहले अस्तित्व में था और इसका उल्लेख प्राचीन महाकाव्यों में मिलता है। पहले कुबेर टीला जर्जर अवस्था में था, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से इसका जीर्णोद्धार कराया गया। परिसर में विशाल जटायु की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां कुबेश्वरनाथ महादेव का जलाभिषेक कर चुके हैं। सावन के दौरान यहां विशेष रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है।
भगवान राम के पुत्र कुश ने कराया नागेश्वरनाथ मंदिर का निर्माण
अयोध्या के प्राचीन शिव मंदिरों में नागेश्वरनाथ मंदिर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसकी स्थापना भगवान राम के पुत्र कुश ने की थी।
पौराणिक कथा के अनुसार, सरयू में स्नान के दौरान राजा कुश का कड़ा नाग कन्या कुमुदनी ने ले लिया था। इसके बाद नागों और कुश के बीच लंबे समय तक युद्ध हुआ। जब नाग वंश संकट में आया तो नागों ने भगवान शिव की आराधना की। भगवान शिव प्रकट हुए और दोनों पक्षों में समझौता कराया। इसके बाद कुश और कुमुदनी का विवाह हुआ।
मान्यता है कि कुश और कुमुदनी ने भगवान शिव से अयोध्या में निवास करने का आग्रह किया। उनकी प्रार्थना पर भगवान शिव सरयू तट पर नागेश्वरनाथ के रूप में विराजमान हुए। कहा जाता है कि नागों ने भगवान शिव को अपने फनों पर धारण किया था, इसी वजह से यहां शिवलिंग का संबंध नागों से जोड़ा जाता है।
दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए की थी क्षीरेश्वरनाथ की पूजा
राम मंदिर से करीब 500 मीटर की दूरी पर क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर स्थित है। मान्यता है कि महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की कामना से पुत्रेष्टि यज्ञ से पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी।
कहा जाता है कि महाराजा दशरथ ने भगवान शिव का दूध से अभिषेक किया था। इसी कारण यहां एक कुंड बना, जिसे क्षीरसागर के नाम से जाना जाता है। इसके बाद महाराजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई।
यही वजह है कि सावन के महीने में क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
सावन को लेकर सुरक्षा के खास इंतजाम
सावन में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। अयोध्या रेंज के डीआईजी सोमेन वर्मा के मुताबिक सरयू घाटों से लेकर मठ-मंदिरों तक विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
घाटों पर जल पुलिस की तैनाती के साथ सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वाटरप्रूफ पंडाल और अन्य व्यवस्थाएं भी की गई हैं। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि सावन में अयोध्या आने वाले शिव भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो।
रामलला की नगरी में इस बार सावन का दृश्य भक्ति के दो रंगों को एक साथ समेटे हुए है। एक ओर राम नाम की गूंज है तो दूसरी ओर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे। यही संगम अयोध्या को इस सावन और भी खास बना रहा है।9
