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लखनऊ: KGMU के इतिहास में नया अध्याय, डॉ. सोनिया नित्यानंद फिर बनीं कुलपति

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) की कमान एक बार फिर पद्मश्री डॉ. सोनिया नित्यानंद को सौंपी गई है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए दोबारा कुलपति नियुक्त किया है। इसके साथ ही KGMU के इतिहास में डॉ. सोनिया नित्यानंद ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। वह विश्वविद्यालय के इतिहास में लगातार दूसरी बार कुलपति बनने वाली पहली चिकित्सक हैं।

1905 में स्थापित KGMU में अब तक 36 प्रिंसिपल और विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद 12 कुलपति रह चुके हैं, लेकिन किसी कुलपति की दोबारा नियुक्ति का अवसर पहली बार डॉ. सोनिया नित्यानंद को मिला है।

पहले कार्यकाल में कई बड़ी उपलब्धियां

अगस्त 2023 से 2026 तक के अपने पहले कार्यकाल में डॉ. सोनिया नित्यानंद के नेतृत्व में KGMU ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। विश्वविद्यालय को NAAC से A++ ग्रेड मिला। वहीं NIRF रैंकिंग में KGMU देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में शामिल हुआ।

उनके कार्यकाल में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा का विस्तार हुआ और CSR के सहयोग से करीब 190 सब्सिडी वाली रोबोटिक सर्जरी की गईं। इसके अलावा लिवर, किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी जटिल चिकित्सा सेवाओं को भी गति मिली।

मरीजों को बेहतर आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 500 बेड वाले नए ‘ट्रॉमा-2’ सेंटर के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की गई।

पिता के साथ साझा किया पद्मश्री सम्मान

डॉ. सोनिया नित्यानंद देश की जानी-मानी इम्यूनोलॉजिस्ट, हीमैटोलॉजिस्ट और चिकित्सा शिक्षिका हैं। उन्होंने 1986 में KGMU से MBBS और 1989 में MD (मेडिसिन) की डिग्री हासिल की थी।

चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान के लिए वर्ष 2025 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। खास बात यह है कि उनके पिता को भी पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। इस तरह दोनों पिता-पुत्री देश की उन चुनिंदा जोड़ियों में शामिल हैं, जिन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ है।

दूसरे कार्यकाल में बड़ी चुनौतियां

करीब 4,000 से अधिक बेड और प्रतिदिन 7,000 से 8,000 मरीजों की ओपीडी वाले KGMU में देशभर से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में दूसरे कार्यकाल में डॉ. सोनिया नित्यानंद के सामने चिकित्सा सेवाओं को और आधुनिक बनाने, मरीजों की सुविधाओं का विस्तार करने और नए ट्रॉमा-2 सेंटर को समय से पूरा कराने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी।

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