Homeउत्तर प्रदेशअखिलेश के संविधान वाले बयान पर राजभर का पलटवार

अखिलेश के संविधान वाले बयान पर राजभर का पलटवार

न्यूज डेस्क ,लखनऊ 

लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया। संविधान और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने सपा के पूर्व शासनकाल को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।

ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव जब संविधान की बात करते हैं तो उन्हें हंसी आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब थी और गुंडागर्दी का बोलबाला था। राजभर ने कहा कि उस समय बहन-बेटियों की इज्जत सुरक्षित नहीं थी और अपराधियों के हौसले बुलंद थे।

राजभर ने दंगों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सपा सरकार के दौरान करीब एक हजार दंगे हुए। उन्होंने खास तौर पर मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि जब मुजफ्फरनगर जल रहा था, तब सपा के लोग सैफई में नाच-गाना देखने में व्यस्त थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों के शासनकाल में ऐसी घटनाएं हुईं, वे आज संविधान और लोकतंत्र की बात कैसे कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को पहले अपने शासनकाल का हिसाब जनता को देना चाहिए। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान प्रदेश में आम लोगों के बजाय कुछ खास वर्गों को प्राथमिकता दी गई और सामाजिक न्याय के नाम पर अति पिछड़ों के साथ अन्याय हुआ।

अति पिछड़ों के हक को लेकर भी हमला

ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने अति पिछड़ी जातियों के अधिकारों को दबाया। उन्होंने कहा कि अति पिछड़ों को उनका वास्तविक हक नहीं मिला और जाति के आधार पर लोगों को चिन्हित कर अपनी जाति के लोगों को आगे बढ़ाने का काम किया गया।

राजभर ने दावा किया कि अधिकारियों की नियुक्तियों में भी जातिगत पक्षपात किया गया। उन्होंने कहा कि 86 एसडीएम में से 56 एसडीएम एक ही जाति के बनाए गए थे। हालांकि, यह राजभर का राजनीतिक आरोप है और उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि यहां नहीं की गई है।

संविधान के मुद्दे पर अखिलेश को घेरा

राजभर ने कहा कि संविधान सभी के अधिकारों और समानता की बात करता है, लेकिन सपा के शासनकाल में अति पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार नहीं मिला।

उन्होंने अखिलेश यादव से सवाल किया कि अगर वे आज संविधान और सामाजिक न्याय की बात कर रहे हैं तो अपने शासनकाल में पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों के साथ हुए कथित भेदभाव का जवाब भी दें।

उन्होंने कहा कि जनता अब पुराने शासन और मौजूदा शासन के बीच अंतर देख रही है। राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि संविधान की बात करने से पहले अपने कार्यकाल का मूल्यांकन करना चाहिए।

ओम प्रकाश राजभर के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और सुभासपा के बीच जुबानी जंग और तेज होने के आसार हैं। राजभर लगातार सपा पर अति पिछड़ों के मुद्दे को लेकर हमला करते रहे हैं और अखिलेश यादव के बयानों पर पलटवार करते हुए सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था और सामाजिक समीकरणों को निशाने पर लेते रहे हैं।

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