न्यूज डेस्क ,लखनऊ
लखनऊ। करीब 17-18 वर्षीय एक युवक, जो 7 अगस्त 2025 को बाराबंकी में ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था, को एक साल से अधिक समय बाद आखिरकार आश्रय मिल गया। हादसे के बाद पुलिस कांस्टेबल उसे उसी दिन KGMU लखनऊ लेकर पहुंचे थे। जांच के बाद 8 अगस्त को युवक का ऑपरेशन किया गया।

इलाज के बाद युवक की हालत में काफी सुधार हुआ और अब वह स्वयं खाना-पीना व दैनिक कार्य करने में सक्षम है। हालांकि, वह अभी भी स्पष्ट रूप से बोल नहीं पाता है।

युवक के बाराबंकी/बंकी से जुड़े होने के संकेत मिलने के बाद KGMU की टीम ने उसकी पहचान के लिए कई स्कूलों, थानों, मंदिरों और रेलवे स्टेशनों पर संपर्क किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अतुल उपाध्याय ने आधार सत्यापन और पहचान की प्रक्रिया में भी लगातार प्रयास किए।
न्यूरोसर्जरी विभाग की सिस्टर प्रिया राय की टीम, डॉ. अभिषेक सिंह और रेजिडेंट्स ने युवक के इलाज में अहम भूमिका निभाई। वहीं गुरप्रीत सिंह लांबा के प्रयासों से 14 अगस्त को युवक को मिशनरीज ऑफ चैरिटी, मोहनलालगंज के शेल्टर होम में स्थानांतरित कर दिया गया।

KGMU न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष एवं चीफ मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ. बालकृष्ण ओझा ने युवक की मदद करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मानवीय प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक हैं और आगे भी इस तरह की मदद जारी रहनी चाहिए।
